अयोग्य ठहराए गए 20 AAP विधायकों में 1 मंत्री भी, उपचुनाव के लिए तैयार दिल्ली?

नई दिल्ली की सियासत ने एक बार फिर करवट ली है. प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी को करारा झटका लगा है.

नई दिल्ली की सियासत ने एक बार फिर करवट ली है. प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी को करारा झटका लगा है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग की सिफारिश पर ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के मामले में 20 आप विधायकों को अयोग्य करार दिया है. 67 विधायकों के बहुमत से आई ‘आप’ के पास अब 46 ही विधायक बचे हैं. हालांकि, इससे सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

अयोग्य ठहराए गए 20 विधायकों में दिल्ली सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत भी शामिल हैं, वह भी संसदीय सचिव के पद पर तैनात रहे थे. लेकिन आठ महीने ही मंत्री रहने के बाद अब उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ेगा. नजफगढ़ से विधायक कैलाश गहलोत दिल्ली सरकार में सूचना-तकनीक, कानून मंत्री थे. गहलोत की ग्रामीण दिल्ली क्षेत्र में अच्छी पकड़ है.

उपचुनाव की तैयारियां तेज

20 विधायकों की सदस्यता जाने के बाद अब इन सीटों पर उपचुनाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि, आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर अभी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकती है.

आप ने राष्ट्रपति के इस आदेश को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है. उपचुनाव की चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने 26 जनवरी को अपने कार्यकर्ताओं को बैठक बुलाई है.

हमें प्रताड़ित किया गया: केजरीवाल

राष्ट्रपति के फैसले पर बोलते हुए नजफगढ़ में कार्यक्रम के दौरान रविवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लगातार उन्हें और उनकी पार्टी को प्रताड़ित किया जा रहा है.

सीएम केजरीवाल ने कहा कि उनके विधायकों पर झूठे मामले दर्ज किए गए, गिरफ्तार किया गया, यहां तक कि उनके दफ्तर पर सीबीआई की रेड भी करवाई गई और दिन भर की उस रेड में उन्हें मफलर के अलावा कुछ नहीं मिला.

राज्यसभा को लेकर पकी बीजेपी-आप की खिचड़ी: कांग्रेस

कांग्रेस दिल्ली अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि 22 दिसम्बर 2017 से 19 जनवरी 2018 के बीच में भाजपा सरकार द्वारा मनोनीत चुनाव आयोग और आप पार्टी के बीच में क्या खिचड़ी पक रही थी?

जबकि 22 दिसम्बर 2017 को चुनाव आयोग ने दिल्ली की 3 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की घोषणा कर दी थी और एक महीने बाद यानि 19 जनवरी 2018 को ही क्यों 20 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की अनुशंसा राष्ट्रपाति महोदय को की गई.

#13 मार्च 2015 को आप ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया था. जिसके बाद मई 2015 में इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज की गई.

#19 जून 2015 को प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास संसदीय सचिवों की सदस्यता रद्द करने की मांग की.

#8 सितंबर, 2016 को अदालत ने भी सभी संसदीय सचिवों की नियुक्ति को खारिज किया. अदालत अनुसार, ये फैसला उपराज्यपाल की अनुमित बगैर लिया गया था.

#22 जून 2017 को शिकायत राष्ट्रपति की ओर से चुनाव आयोग भेजी गई.

#21 जनवरी, 2018 चुनाव आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने सभी 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी.

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