म‍िटा दी जाएगी लेह के स्कूल से आमिर खान की थ्री इडियट्स की सबसे बड़ी निशानी

द्रुक पद्मा कार्पो स्कूल ने यहां बनी रैंचो वॉल को गिराने का फैसला किया है।

बॉलीवुड फिल्में न केवल देश में मनोरंजन के सबसे बड़े साधन के रूप में शुमार हैं बल्कि किसी भी जगह को जबरदस्त लोकप्रिय बनाने का माद्दा भी रखती हैं। हालिया दशक में फिल्म ये जवानी है दीवानी देखने के बाद मनाली जाने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई थी इसके अलावा फिल्म ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा देखने के बाद स्पेन जाने वाले लोगों की संख्या में भी जबरदस्त इज़ाफा देखने को मिला था।

लेकिन फिल्मों द्वारा प्रचार हर बार किसी जगह के लिए सकारात्मक नहीं होता है और ऐसा ही देखने को मिला लेह में। आमिर खान की फिल्म थ्री इडियट्स के साथ ही सुर्खियों में आए द्रुक पद्मा कार्पो स्कूल ने यहां बनी रैंचो वॉल को गिराने का फैसला किया है। इसके साथ ही साथ स्कूल में टूरिस्ट्स के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि ये दीवार छात्रों का काफी ध्यान भटका रही है।

गौरतलब है कि द्रुक पद्मा कार्पो एजूकेशन सोसायटी द्वारा बनाए गए इस स्कूल में थ्री इडियट्स के कई दृश्य फिल्माए गए हैं। फिल्म में इस स्कूल की एक दीवार का दृश्य था, जिसमें चतुर रामालिंगम नामक किरदार पेशाब कर रहा है और स्कूली बच्चों के एक स्वदेशी आविष्कार की वजह से उसे बिजली का झटका लगता है। स्कूल के प्रशासन ने इस दीवार को पेंट कर दिया था और दीवार को रैंचो वॉल कहा जाने लगा था। फिल्म में आमिर खान द्वारा निभाए गए किरदार का नाम फुनसुख वांगड़ु और रैंचो था। फिल्म को जबरदस्त सफलता हासिल हुई और लेह आने वाले पर्यटकों में ये दीवार काफी लोकप्रिय हो गई। जो भी लेह आता, वह इस दीवार के पास खड़े होकर अपनी तस्वीर जरूर खिंचवाता।

स्कूल प्रिंसिपल स्टेंजिन कुनजेंग ने बताया कि फिल्म के हिट होने के साथ ही हमारे स्कूल को भी काफी पब्लिसिटी मिली। लेह आने वाले लोगों के लिए ये एक टूरिस्ट स्पॉट बन गया। यहां भीड़ बढ़ने लगी और हमने महसूस किया कि इस इलाके में हमने जिस मकसद से स्कूल स्थापित किया है, वह पूरा नहीं हो रहा है। पर्यटकों के कारण जहां छात्रों का ध्यान बंट रहा है, वहीं स्कूल परिसर में पर्यटक गंदगी भी फैलाते हैं। गौरतलब है कि लद्दाख के आध्यात्मिक गुरु 12वें ग्यालवांग द्रकुपा की शिक्षाओं से प्रभावित होकर इस स्कूल का निर्माण 1998 में कराया गया था। इस स्कूल का मकसद लद्दाख के बच्चों को आधुनिक शिक्षा मुहैया कराना था।

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