‘आप’ पदाधिकारी जमानत पर हुए रिहा

अदालती जंग में सरकार की दलीलें पड़ीं तंग

रायपुर।

आम आदमी पार्टी (आप) की छत्तीसगढ़ इकाई ने राज्य सरकार के अन्याय के खिलाफ पहली जंग जीत ली है। राज्य सरकार के इशारे पर जेल में निरुद्ध किए गए ‘आप’ के प्रदेश संयोजक डॉ. संकेत ठाकुर सहित 12 पदाधिकारियों के खिलाफ पुलिस की कोई दलील काम नहीं आई।

जिला एवं सत्र ​न्यायालय ने इनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। छत्तीसगढ़ में ‘आप’ के चुनाव प्रबंधन प्रभारी राकेश सिन्हा ने इस सफलता के बाद डॉ. रमन सिंह की सरकार को चेतावनी दी कि राज्य में आम आदमी की आवाज अब और अधिक समय तक कुचली नहीं जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि भाजपा के ‘कांग्रेसीकरण’ को राज्य की आम जनता अब और नहीं सहेगी। उनके सामने ‘आप’ एक नया विकल्प बनकर उभरी है। यह पार्टी संघर्षों से नहीं डरती।

राज्य सरकार चाहे जितनी भी चुनौतियां इसके सामने खड़ी करे, आम आदमी के सहयोग से इन सभी चुनौतियों का सामना करने में यह पार्टी पूरी तरह से सक्षम होगी।

‘आप’ पर भाजपा के इस कहर के बारे में राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता आज मीडिया को संबोधित करने वाले हैं।

इसके लिए पहले उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 151 लगाई गई। जब राज्य सरकार को इस पर संतोष नहीं हुआ तो पुलिस ने उसके इशारे पर गिरफ्तारी के एक दिन बाद ‘आप’ नेता और पदाधिकारियों के खिलाफ गैर—जमानती धारा 147, 151, 186, 332, 353, 419 भी लगा दी।

वहीं, अदालत में यह धाराएं लगाने का कोई भी आधार पुलिस साबित नहीं कर सकी। अदालत ने ‘आप’ की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।

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