एसीबी पूर्व चीफ व निलंबित एडीजी जीपी सिंह और उनके करीबियों नोटिस जारी

एडीजी की तलाश में रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर तक जांच

रायपुर:राजद्रोह का केस दर्ज करने के बाद एसीबी पूर्व चीफ व निलंबित एडीजी जीपी सिंह और उनके करीबियों को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में साफ निर्देश दिया गया है, जिसके पास जो साक्ष्य हो वो पुलिस के पास जमा कर दें व अपना बयान दर्ज करवाए। तीन दिन तक इंतजार किया जाएगा, उसके बाद सख्त कार्रवाई होगी।

दूसरे राज्य जाने की चर्चा

शुक्रवार को निलंबित एडीजी जीपी सिंह की तलाश में रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर तक जांच की गई। पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। वहीं, चर्चा है कि जीपी दूसरे राज्य निकल गए हैं।

पुलिस ने बिलासपुर से सभी अलग-अलग ओर जाने वाले रास्तों में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला है, लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा। निलंबित एडीजी के घर व परिचितों की निगरानी पुलिस द्वारा की जा रही।

सहयोगियों को नोटिस

पुलिस के अधिकारियों ने निलंबित एडीजी जीपी सिंह, उनके सहयोगी मणीभूषण, प्रीतपाल चाण्डोक, राजेश बाफना को नोटिस जारी किया है। निलंबित एडीजी के निवास अफसर नोटिस लेकर पहुंचे, लेकिन वहां किसी ने रीसिव नहीं किया तो वापस लौट आए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शनिवार को पूर्व एसीबी चीफ के घर नोटिस लेकर फिर अफसर जाएंगे।

शिकायतकर्ता और गवाहों का बयान किया दर्ज

राजद्रोह मामले में पुलिस ने शिकायतकर्ता और दस्तावेज जब्ती के समय मौजूद गवाहों का बयान दर्ज किया है। मामले में दस्तावेजों की पुलिस कराएगी हेंड राइटिंग एक्सपर्ट से जांच कराई जाएगी। वहीं, अब पुलिस जांच के लिए ्रष्टक्च, श्वह्रङ्ख से जब्त दस्तावेजों को मांगेगी। वहीं, दूसरी ओर जीपी सिंह की ओर से बिलासपुर हाईकोर्ट में रिट याचिका लगाए जाने के बाद राज्य सरकार ने अदालत में कैविएट दाखिल किया है।

आंखों के सामने से गायब हुए जीपी

्रष्टक्च और पुलिस सूत्रों के मुताबिक राजद्रोह का केस दर्ज होने से ठीक एक दिन पहले गुरुवार को जीपी सिंह बिलासपुर गए। यहां अपने कुछ करीबी लोगों से मुलाकात की। पीछे-पीछे रायपुर पुलिस की खुफिया टीम जीपी सिंह पर नजर रखे हुए थी। किसी को शक न हो इसलिए पुलिस की टीम गाडिय़ां बदलकर पीछा कर रही थी।

जानबूझकर जीपी सिंह की कार से कुछ फासला रखा गया था। जब जीपी सिंह बिलासपुर पहुंचे तो एक अफसर उन पर नजर रखने की जिम्मेदारी निभा रहे थे। एक जगह पर बाहर पुलिस की टीम इंतजार कर रही थी।

मगर जीपी सिंह वहां से कब निकले किसी को पता नहीं चला। ये बात सामने आई कि जिस टीम पर नजर रखने का जिम्मा था उसकी गाड़ी की चाबी खो गई और इसी चूक का फायदा जीपी सिंह को मिल गया।

छत्तीसगढ़ के बाहर भी नजर रखने की खबर

बुधवार के दिन करीब 5 टीमें जीपी सिंह पर नजर रखे हुए थी, जो हर थोड़ी दूरी पर दूसरी टीम को अपडेट दे रही थी। इस घेराबंदी के बाद भी कभी सुपरकॉप के नाम से मशहूर जीपी सिंह सुरक्षित निकलने में कामयाब हो गए। अब रायपुर के सरकारी बंगले में जीपी सिंह की दो सरकारी गाडिय़ां जस की तस खड़ी हैं और बाहर पुलिस का पहरा है।

खबर है कि इस केस को लेकर अफसर लगातार बैठकें कर रहे हैं। खबर ये भी है कि प्रदेश में जीपी सिंह के कुछ करीबी कारोबारी और दोस्तों पर भी पुलिस नजर रखे हुए है। एमपी, ओडिशा और पंजाब में भी जीपी से जुड़ी हर अपडेट पर नजर रखी जा रही है।

मातहत रहे अधिकारी-कर्मचारी दे रहे जानकारी

एसीबी-ईओडब्ल्यू के जीपी सिंह विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। विभाग में कई अधिकारी और कर्मचारी उसके विश्वास पात्र है जिनके द्वारा उन्हें एसीबी की गतिविधियों की जानकारी मिल रही है। जानकारों के अनुसार जीपी सिंह को छापे से 15 दिन पहले ही जानकारी हो गई थी, तभी से वे अपने सारे जरूरी दस्तावेज और पैसे ठिकाने लगाने लग गए थे।

तमाम दस्तावेज और पैसे पंजाब और उत्तर-पूर्व छग में ठिकाने लगाने की चर्चा है। एफआईआर दर्ज होने की जानकारी भी उसे पहले ही मिल गई थी, इसी दौरान वे पुलिस को चकमा देकर गायब हो गए। पुलिस उसे बिलासपुर में तलाशती रही लेकिन उसका पता नहीं लगा सकी।

यूपी में अंडरग्राउंड होने की चर्चा

जानकारों से जो खबर आ रही है उसके अनुसार जीपी ंिसंह के गायब होकर यूपी में पनाह लेने की संभावना है। उसके वहीं अंडर ग्राउंड रहकर तमाम गतिविधियों पर अपने विश्वसनीय लोगों के माध्यम से नजर रखने की चर्चा है।

फिलहाल पुलिस हर संभावित जगहों पर उसकी तलाश में दबिश दे रही है। यह भी चर्चा है कि छापे से पहले ही उसने अपने विश्वस्त के माध्यम से दो महंगे और दो सस्ते मोबाइल व दर्जन भर सिम खरीदे थे।

सुप्रीम कोर्ट में भी केविएट

इधर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी केविएट दायर कर दी है ताकि हाईकोर्ट से राहत नही मिलने की स्थिति में जीपी सिंह के सुप्रीम कोर्ट का रूख करने पर वहां सरकार अपना पक्ष रख सके।

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