कोरोना संक्रमित मृत व्यक्तियों की जानकारी छुपाने पर होगी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई

केंद्र की तरफ से यह बात अदालत को दिए गए हलफनामें में कही गयी

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने 24 मई को सुझाव दिया था कि कोई मौत कोरोना से हुई है उसकी जांच के लिए एक समान नीति होनी चाहिए। साथ ही कोविड -19 से प्रभावित लोगों के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कुछ दिशानिर्देश भी होने चाहिए।

जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने सरकार से कहा था कि कई बार मृत्यु प्रमाण पत्र में दिए गए कारणों में हर्ट अटैक या अन्य कारण बताए जाते हैं। लेकिन मौत के पीछे का प्रमुख कारण कोविड-19 होता है। अदालत ने केंद्र के वकील से पूछा था कि ऐसे मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे जारी किए जा रहे हैं?”

गृह मंत्रालय ने हलफनामे में कहा “यह अनिवार्य है कि कोविड -19 से होने वाली किसी भी मृत्यु को कोवि़ड की मृत्यु के रूप में प्रमाणित किया जाना चाहिए, ऐसा नहीं करने पर प्रमाणित करने वाले डॉक्टर सहित सभी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। ” सरकार की तरफ से कहा गया है कि कुछ अपवादों को छोड़कर कोरोना से होने वाली मौतों को उस के अंदर ही माना जाएगा।

अदालत में कहा गया है कि भारत में कोविड -19 से संबंधित मौतों की पुष्टि के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा स्पष्ट दिशानिर्देश दिया गया है। यह दिशानिर्देश डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मॉर्टेलिटी कोडिंग के अनुरूप है।

हलफनामे में कहा गया है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद मृत्यु के कारण के बारे में एक प्रमाण पत्र डॉक्टरों के द्वारा जारी किया जाता है। जिसमें मृत्यु का कारण बताया जाता है। मृत्यु प्रमाण पत्र का यह कारण मृत्यु सूचना प्रपत्र के साथ रजिस्ट्रार को भेजा जाता है जिसके आधार पर मृत्यु का पंजीकर

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