छत्तीसगढ़

सेना निवृत्त वन-क्षेत्रपाल के विरुद्ध जारी वसूली आदेश पर उच्च न्यायालय से स्थगन

स्थगन जारी करते हुए शासन को जवाब देने हेतु निर्देशित किया

कोरबा: आज सेवा निवृत्त के बाद चार लाख की वसूली आदेश के विरुद्ध सुनवाई करते हुए माननीय उच्चतम न्यायलय ने प्रथम दृष्टी में वसूली आदेश विधि विरुद्ध पाते हुए स्थगन जारी करते हुए शासन को जवाब देने हेतु निर्देशित किया.

आमिर खान वन-क्षेत्रपाल दिनांक 30/06/2018 को सेवा निवृत्ति हुए, इसके बाद वनमंडलाधिकारी कोरबा वनमंडल ने एक पुराने प्रकरण में लगभग 20 लाख रूपये की वसूली आदेश जारी करते हुए सेवा निवृत्ति के बाद दिए जाने वाले सभी लाभों को रोक दिया गया था.

जिसमें विभागाध्यक्ष को अभ्यावेदन देने पर 4 वर्ष से अधिक पुराना प्रकरण होने के कारण प्रकरण में वसूली की कार्यवाही निरस्त कर दी गई थी, परन्तु इसके बाद भी वनमंडलाधिकारी द्वारा वसूली लंबित रहने के अधर पर डे लाभों को रोककर रखा गया.

जिसके विरुद्ध उन्होंने अधिवक्ता संदीप दुबे एवं आलोक ऋषि के माध्यम से एक याचिका दायर करने पर ग्रेच्युटी एवं सिक्योरिटी डिपोजिट की लगभग 60 लाख की राशी छोड़कर बाकी डे राशियों का भुगतान कर दिया गया.

इस याचिका की सुनवाई के दौरान ही वनमंडलाधिकारी के पुनः सेवा निवृत्ति के दो साल बाद सेवाकाल में नियमित खरीदी करने के आधार पर लगभग 4 लाख की वसूली निकलते हुए ग्रेच्युटी से वसूली का आदेश पारित किया गया.

जिसके विरुद्ध की गई विभागीय अपील में असफलता पर, पुनः एक अन्य याचिका दायर करते हुए अनावश्यक बारंबार प्रताड़ित करने, बिना विभागीय जांच एवं अधिकार के वसूली करने के साथ-साथमुख्य वन संरक्षक द्वारा नियमानुसार अपील का निस्तारण न करने अदि के आधार पर लगाईं, जिसकी सुनवाई में आज याचिका मानी करते हुए अंतरिम राहत बतौर स्थगन जारी किया.

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