प्रशासन की अव्यवस्था की भेंट चढ़ा करोड़ों का धान

बे-मौसम बारिश के कारण सरकार को होगा नुकसान

रायपुर।

सोमवार को छत्तीसगढ़ में मौसम ने करवट ली और जमकर बादल बरस रहे हैं। तूफान फेथई के कारण मौसम विभाग ने 48 घंटां की चेतावनी दी है। बकौल विभाग इन 48 घंटों में बारिश के साथ-साथ शीतलहर भी चलेगी। पर इस बे-मौसम बारिश के कारण कई जिलां की मंडी में रखा हुआ धान पूरी तरह से भीग गया है। धान के भीगने की वजह से धान के सड़ने की आशंका बनी हुई है।

राजधानी रायपुर में ही मंडी में रखा हुआ धान बे-मौसम की भेंट चढ़ चुका है। हालांकि इस दफे पिछले साल की तुलना में कम धान की खरीदी हुई है। लेकिन मंडी में खुले में रखा धान बारिश में भीगने के कारण अंकुरित हो जाएगा, जिसे फेंकने के सिवा और कोई चारा नहीं होगा। यानी प्रशासन ने करोड़ों रूपये की जो धान खरीदी है, वह रकम भी पूरी तरह से डूब जाएगी।

मंडियों के अलावा किसानां के घर खुले में रखे धान भी बारिश में खराब हो चुके हैं। जो किसान नई सरकार आने के बाद अधिक बोनस लेकर धान बेचने का सपना देख रहे थे, उनकी उम्मीदों पर इस बारशि ने पूरी तरह से पानी फेर दिया है।

आपको बता दें कि इससे पहले गुरूवार को भी बे-मौसम बारिश हुई थी जिसमें कई जिलों में मंडियां में रखे धान के भीगने की खबर सामने आ रही थी।

धमतरी जिले में ही खुले में रखा कई क्विंटल धान पूरी तरह से भीग गया है। प्रशासन ने हालांकि बोरियों में भरकर धान को बचाने की जुगत कराई लेकिन भारी बारिश के कारण उनकी कोशिशें विफल हो गयी।

राजनांदगांव में भी मंडी में रखा धान भीग चुका है। सेवा सहकारी समितियां और उप-केन्द्रों में रखा हुआ धान खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है। सुबह से हो रही तेज बारिश और प्रशासन की बद-इंतजामी के कारण धान भीग चुका है, जिसका बड़ा खामियाजा सरकार को उठाना पड़ सकता है।

आपको बता दें कि धान को भीगने से बचाने के लिए सरकार समिति प्रबंधकों को तिरपाल सहित अन्य प्रकार की सुविधाआें के लिए राशि देती है लेकिन प्रबंधकां की लापरवाही से कई क्विंटल धान बर्बाद हो जाते हैं। हर साल ठंड के मौसम में बारिश होती है और करोड़ों रूपये के धान भीगकर खराब हो जाते हैं लेकिन प्रशासन की इस बाबत कभी तैयारी नहीं होती और सरकार के करोड़ों रूपये डूब जाते हैं।

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