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ADR रिपोर्ट: BJP बन गई 12 साल में सबसे अमीर पार्टी

आम जनता के चाहे कभी आएं या नहीं मगर राजनीतिक दलों के अच्छे दिन ज़रूर आते रहते हैं. इसकी मिसाल है वह आंकड़ा जो बताता है कि पिछले 12 साल में भाजपा, कांग्रेस, बसपा और एनसीपी जैसी पार्टियों की संपत्ति कई सौ गुना बढ़ चुकी है.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और इलेक्शन वॉच की ताज़ा रिपोर्ट में राजनीतिक दलों की 2004-05 से 2015-16 के बीच इकट्ठा हुई संपत्ति का ब्योरा दिया गया है. रिपोर्ट की मानें तो बसपा की कुल संपत्ति में बीते 12 साल में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया.

कुल संपत्ति की बात करें तो इसमें 893.88 करोड़ के साथ भाजपा सबसे ऊपर है. रिपोर्ट के मुताबिक एक नज़र राष्ट्रीय दलों की संपत्ति के कुछ आंकड़ों पर.
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ADR की रिपोर्ट के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी की संपत्ति में 2004-05 से 2015-16 के बीच करीब 12 सालों में 1100% का उछाल दर्ज किया गया. 12 साल पहले बसपा की कुल संपत्ति 43.09 करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर 559.01 करोड़ तक पहुँच गई. कुल बढ़ोत्तरी की बात करें तो पार्टी ने इस बीच 500 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बनाई.
पहले और नोटबंदी के बाद भी मायावती के भाई आनंद कुमार पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप लगे थे. बेनामी कंपनियों से लेकर नोटबंदी के बाद करोड़ों का कैश बैंक में जमा कराने तक, कई बार वो विपक्षी दलों के निशाने पर रहे.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र के कद्दावर नेता शरद पवार की पार्टी एनसीपी ने भी संपत्ति के मामले में नए कीर्तिमान दर्ज किए. रिपोर्ट कहती है कि साल 2004-05 में एनसीपी की कुल दौलत 1.6 करोड़ थी, जो 12 साल बाद बढ़कर 14.54 करोड़ हो गई. आंकड़ों में बेशक यह कम लगे पर इसमें इज़ाफ़ा 808% से ज्यादा फीसद था.
भारतीय जनता पार्टी केंद्र सहित देश के 18 राज्यों में भाजपा पार्टी सत्ता में है. कहीं वह पूर्ण बहुमत, तो कहीं गठबंधन के जरिए सरकार में है. रिपोर्ट के मुताबिक साल 2004-05 में भाजपा के पास कुल 122.93 करोड़ संपत्ति थी, जो 12 साल बाद 893.88 करोड़ हो गई. पार्टी की संपत्ति में इज़ाफ़ा कुल 627% का है.
आंकड़े देखें तो भाजपा ने इन 12 सालों के दौरान 770.95 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति कमाई, जो अन्य सभी राष्ट्रीय दलों में सबसे ऊपर है.

सीपीएम (मार्क्सवादी) जल, जंगल और ज़मीन की बात करने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी भी संपत्ति के मामले में खासी आगे है. इसी दौरान 12 साल में सीपीएम ने अपनी संपत्ति में 383% की बढ़ोत्तरी दर्ज की. 2004-05 में उनकी कुल संपत्ति 90.55 करोड़ थी, जो बढ़कर 2015-16 में 437.78 करोड़ जा पहुंची.

कांग्रेस (इंडियन नेशनल कांग्रेस) देश की सबसे पुरानी और प्रमुख पार्टियों में एक कांग्रेस भी संपत्ति में पीछे नहीं. 12 सालों में 353% की बढ़ोत्तरी के साथ कांग्रेस की वर्तमान में कुल संपत्ति 758.79 करोड़ है. 2004-05 में कांग्रेस की संपत्ति महज़ 167.35 करोड़ थी. फिलहाल कांग्रेस बेशक सत्ता से बाहर है पर संपत्ति में इज़ाफ़े में ज्यादा पीछे नज़र नहीं आती.
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस सीपीआई को पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर करने वाली टीएमसी भी संपत्ति के मामले में राष्ट्रीय पार्टियों से टक्कर लेती दिखाई देती है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की 2004-05 में कुल संपत्ति 25 लाख थी. जो महज़ 12 सालों में बढ़कर 44.99 करोड़ जा पहुंची.

रिपोर्ट के मुताबिक टीएमसी ने एक दशक में 44.5 करोड़ की संपत्ति बनाई.
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया केरल तक सिमट चुकी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया संपत्ति में सबसे कम इज़ाफा दर्ज करने वाली पार्टी है. 12 सालों में सीपीआई की संपत्ति 83% बढ़ी जो बाकी पार्टियों की तुलना में सबसे कम है. जबकि उनकी साथी पार्टी सीपीआई (मार्क्सवादी) की संपत्ति 383% तक बढ़ी थी. 2004-05 में सीपीआई की कुल संपत्ति महज़ 5.56 करोड़ थी, जो 2015-16 में बढ़कर 10.18 करोड़ तक हो गई.

राष्ट्रीय पार्टियों की कुल संपत्ति ADR रिपोर्ट के मुताबिक पार्टियों ने जो सूचनाएं सार्वजनिक की हैं, उनमें फिक्स्ड एसेट, लोन और एडवांस, FDR डिपोज़िट, TDS और निवेश शामिल हैं. सर्वाधिक इज़ाफ़ा अन्य सेट में हुआ है, जिसकी डिटेल किसी पार्टी ने सार्वजनिक नहीं की है. रिपोर्ट के मुताबिक 7 राष्ट्रीय पार्टियों की कुल संपत्ति में 12 सालों में 1500 करोड़ से ज्यादा का इज़ाफ़ा दर्ज हुआ है. 2004-05 में कुल संपत्ति 108.655 करोड़ थी, जो 2015-16 में बढ़कर 1605.11 करोड़ जा पहुंची.

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