छत्तीसगढ़

ओपी जिंदल विश्वविद्यालय में “एडवान्सेस इन आयरन एंड स्टील मेकिंग

"इंडस्ट्रियल पर्स्पेक्टिव" पर कार्यशाला का आयोजन

रायगढ़ : ओपी जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ के स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग के मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग विभाग (एमएमई), द्वारा 01 अक्टूबर, 2018 को विश्वविद्यालय परिसर में “एडवान्सेस इन आयरन एंड स्टील मेकिंग: इंडस्ट्रियल पर्स्पेक्टिव” पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । पिछले कुछ दशकों में आयरन और स्टील बनाने की तकनीक में बदलाव आया है और लोहे बनाने की क्षमता, उत्पादकता और गर्म धातु की गुणवत्ता के संदर्भ में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 21 वीं शताब्दी में लोहा और इस्पात में प्रगति के महत्व को ध्यान में रखते हुए, एमएमई विभाग ने एमएमई के छात्रों और प्राध्यापकों के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को आयरन और स्टील बनाने और संबंधित उत्पाद विकास के मुद्दों में वर्तमान में हुई प्रगति को समझाना था।आईआईटी खड़गपुर से आये प्रोफेसर (डॉ) जी. जी. रॉय और एनआईटी राउरकेला के प्रोफेसर (डॉ) एस पाल ने प्रमुख वक्ता के रूप में इस कार्यशाला में प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने विचार रखे ।

कार्यशाला की शुरुआत में दोनों अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम समन्वयक श्री इज़हार हुसैन, सहायक प्राध्यापक (एमएमई) और त्रिनाथ तालपाननी सहायक प्राध्यापक (एमएमई) ने किया। कार्यशाला के दौरान डॉ जी. जी. रॉय ने लोहा बनाने के वैकल्पिक माध्यमों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि भारत ज्यादातर रोटरी किलन प्रक्रिया पर लौह बनाने के वैकल्पिक मार्ग के रूप में निर्भर करता है, जबकि अन्य देश लोहे के अयस्कों से विशेष रूप से लौह बनाने के लिए वैकल्पिक विधि के रूप में अन्य एडवांस्ड तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। भारत में पर्याप्त क्षमता है और इसे अपनी समग्र उत्पादन दर में सुधार के लिए एडवांस्ड तकनीकों को भी अपनाना चाहिए।

प्रतिभागियों से बात करते हुए, डॉ एस. पाल ने उचित केस स्टडीज के साथ स्टील की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार के लिए इस्पात बनाने की प्रक्रिया के थर्मोडायनामिक मॉडलिंग पर अद्यतन जानकारी साझा की; और विभिन्न मॉडलिंग तकनीकों के माध्यम से स्वच्छ स्टील का उत्पादन करने के लिए समाधानों पर भी चर्चा की। उन्होंने अपनी पुस्तक “प्रोसेस मॉडलिंग फॉर स्टील इंडस्ट्री” भी विभागीय पुस्तकालय के लिए प्रदान किया।

कार्यशाला बहुत ही संवादात्मक थी और सभी छात्रों ने दोनों सत्रों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्र के अंत में, कार्यशाला के समन्वयक ने अतिथियों, प्राध्यापकों, और प्रतिभागियों को इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कृतज्ञता के साथ धन्यवाद दिया। डॉ आर. डी. पाटीदार, रजिस्ट्रार, ओपीजेयू, डॉ पी. एस. बोकारे, डीन, स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग और डॉ ए. के. श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष-एमएमई विभाग ने एक बहुत ही उपयोगी कार्यशाला आयोजित करने के लिए समन्वयकों को बधाई दी।

Tags
jindal