विचार

आख़िर “पानी” को क्यों हमारी जरूरत पड़ रहीं हैं ?

आख़िर "पानी" को क्यों हमारी जरूरत पड़ रहीं हैं ?

आख़िर “पानी” को क्यों हमारी जरूरत पड़ रहीं हैं ?

ममता मानकर

“क्षिति जल पावक गगन समीर” पंच महाभूत हैं और हिन्दू सभ्यता के अनुसार इन्हें पूजा जाता हैं, आराधना कि जाती हैं. और जिसे पूजा जाता हैं उसका अपमान कभी नही किया जाता हैं. जल इन पांच तत्वों में से एक हैं लेकिन क्या सही मायनों में जल की आराधना की जा रहीं हैं.

हमारे समाज में ठीक इसके विपरीत किया जा रहा हैं, भारत की बात करे तो यहाँ जल अपव्यय किया जा रहा हैं वो भी भारी मात्रा में अगर हम दिनचर्या की बात करें तो जहा 1 लोटे पानी की जगह 10 लोटे का इस्तेमाल किया जाता हैं, नल का खुला छोड़ना, गाड़ी धोना,और भी कई काम. पृथ्वी का 71 % भाग पानी से ढका हुआ हैं और 1.6 प्रतिशत पानी ज़मीन के नीचे है और 0.001 प्रतिशत वाष्प और बादलों के रूप में है. पृथ्वी की सतह पर जो पानी है उसमें से 97 प्रतिशत सागरों और महासागरों में है जो नमकीन है और पीने के काम नहीं आ सकता. केवल तीन प्रतिशत पानी पीने योग्य है.

भारत प्रायद्वीपीय देश हैं कहने का मतलब तीनो ओर जल से घिरा हुआ और प्राचीनकाल से ही जल पर हमारी निर्भरता हमेशा से रही है और हमेशा रहेगी.क्योंकि इसका विकल्प तो
वैज्ञानिक भी नहीं ढूंढ पाए हैं जल के महत्व से पृथ्वी पर हर एक व्यक्ति वाकिफ है और यह भी जानते हैं कि जल से ही मानव का अस्तित्व है – पृथ्वी का अस्तित्व है.”रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून,पानी गये न ऊबरे, मोती, मानुष, चून’ इस दोहे में रहीम ने पानी के महत्व को तीन अर्थों में प्रयोग किया है.पानी का पहला अर्थ मनुष्य के संदर्भ में है जब इसका मतलब विनम्रता.मनुष्य में हमेशा विनम्रता (पानी) होना चाहिए पानी का दूसरा अर्थ आभा, तेज या चमक से है जिसके बिना मोती का कोई मूल्य नहीं.पानी का तीसरा अर्थ आटे से जोड़ा गया हैं,जिस तरह आटे का अस्तित्व पानी के बिना नम्र नहीं हो सकता और मोती का मूल्य उसकी आभा के बिना नहीं हो सकती है, उसी तरह मनुष्य को भी अपने व्यवहार में हमेशा पानी कि तरफ़ विनम्र रखना चाहिए जिसके बिना उसका मूल्यह्रास होता है.

लेकिन रहिम का दोहा आज के समय में बिल्कुल सटीक बैठता हैं.पानी का मूल्य उन्होंने तब ही लोगो को बता दिया लेकिन आज लोगो को पता होने
के बावजूद भारी मात्रा में पानी का इस्तेमाल अपनी सुविधा के अनुसार कर रहें हैं एक रिपोर्ट में पाया गया हैं की भारत में हर चौथा व्यक्ति गर्मियों में सूखे व् पानी के न होने की
समस्या से जान धो बैठता हैं

कितना आसान हैं ना नल चालू करना, घुमाना, और पानी का बहना यह प्रकिया हमारी हर उन ज़रूरत के अनुसार होती हैं, जब जब हमें पानी की आवश्यकता होती हैं और हम
उतनी ही मात्रा में या उससे अधिक पानी का इस्तेमाल करते हैं.लेकिन यहीं पानी 1 घण्टे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए तो ?इंतज़ार में गला सूख जाएगा, चीज़े अस्त व्यस्त हो
जाएंगी और हमारी ज़िंदगी थम सी जाएगी.सभी को पता हैं कि जल संरक्षण आज के समय मे कितना जरूरी हैं फिर भी लोगो तक यह बात अब भी पहुचानी पड़ती हैं आख़िर क्यो ?

इतिहास की बात करें तो दुनियाभर में विभिन्न सभ्यताओं का आरंभ नदी के किनारे से ही हुआ है अर्थात जल स्रोतों से चाहे हम हड़प्पा की बात करें तो यह सिंधु नदी के किनारे बसा था।
जल संरक्षण की बात करे तो इसके कई उपाय किए जा चुके हैं और किए भी जा रहें हैं लेकिन जितनी मात्रा में पानी का अभाव बढ़ता जा रहा दुनिया से इसके लिए आवश्यक हैं लोगो
का जागरूक होना अपनी जिम्मेदारियों को समझना साथ ही समाज में पानी को लेकर जो भी समयस्या आती हैं उनमे अपनी भूमिका निभाना. साथ हीं घरेलू कामो में पानी का उपयोग
जरूरत के अनुसार हो ना की सुविधा के अनुसार.जल ही जीवन हैं और जीवन अमूल्य हैं ये बाते हम रोज कहीं न कहीं देखने और सुनने को मिल जाएगी लेकिन इस पर अमल किया
जाना भी आवश्यक हैं

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