सीसीएन पर कार्रवाई के बाद अब कई अन्य डीलर भी निशाने पर, जांच में फंसे

अंकित मिंज

बिलासपुर।

मनोरंजन कर के नाम पर प्रति महीने लाखों रुपए की गड़बड़ी करने वाले सीसीएन डिजिटल नेटवर्क का लायसेंस निरस्त करने के बाद अब राज्य जीएसटी के निशाने पर सीसीएन हैथवे नेटवर्क है। पत्रिका ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया तो अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू की। स्टेट जीएसटी को गत डेढ़ वर्षों से प्रति महीने महज 3 से 4 लाख
रुपए प्रति महीने मनोरंजन कर का भुगतान किया जा रहा है।

जबकि केबल ग्राहकों की संख्या 1.50 से अधिक होने के कारण 18 प्रतिशत की दर से विभाग को प्रति महीने 40 लाख रुपए से अधिक का राजस्व मिलना चाहिए। स्टेट जीएसटी कमिश्नर संगीता पी ने अधिकारियों को मनोरंजन और सेवा कर में अफरातफरी करने वाले केबल संचालकों व कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।

निर्देश दिए हैं कि किन चैनल द्वारा कितने कनेक्शनों की जानकारी विभाग को उपलब्ध कराई है और इसके एवज में कितना भुगतान किया है। इसकी जानकारी एकत्रित करें, गड़बड़ी पाए जाने पर जीएसटी के प्रावधानों के अनुसार पेनल्टी की कार्रवाई करें। आने वाले दिनों में बिलासपुर संभाग के 3309 डीलरों पर कर चोरी के मामले में गाज गिरने की संभावना है।

20 लाख से अधिक के टर्न ओवर वाले केबल आपरेटरों पर भी कसेगा शिकंजा: जीएसटी के प्रावधानों के तहत सालाना 20 लाख रुपए से अधिक के टर्न ओवर वाले केबल आपरेटरों को भी स्टेट जीएसटी में अलग से पंजीयन लेकर कर का भुगतान करना अनिवार्य है। विभाग द्वारा मामले की जांच और अधिक काटर्न ओवर प्रमाणित होने पर पेनल्टी का प्रावधान है। हालांकि विभाग अगले वित्तीय वर्ष से इस योजना पर काम करेगा। अभी फिलहाल मार्च तक ढील दी गई है।

सेंट्रल जीएसटी में नहीं किया एक रुपए का भुगतान

सीसीएन डिजि़टल नेटवर्क ने जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई 2017 से सेंट्रल जीएसटी में एक रुपए का भुगतान नहीं किया। जीएसटी की नियमों में आए दिन हो रहे संशोधन का फायदा उठाते हुए कर चुराने की रणनीति अपनाई गई। सेंट्रल जीएसटी के रिकार्ड में फर्म की नाम की बजाय पंजीयन नंबर से जानकारी दर्ज होने के कारण अभी तक विभाग की नजरों में कर चोरी का पूरा मामला दबा हुआ था। लेकिन पत्रिका में मनोरंजन कर चोरी की ना सिर्फ बिलासपुर बल्कि प्रदेश भर में 100 करोड़ से अधिक की अफरातफरी की खबरों के लगातार प्रकाशन के बाद विभाग कुंभकर्णी नींद से जागा।

कर चोरी में 100त्न ड्यूटी के साथ 18 प्रतिशत ब्याज

जीएसटी के प्रावधान 121 और 131 के तहत मनोरंजन और सेवा कर चोरी प्रमाणित होने के बाद विभाग द्वारा बकाया राशि पर 100 प्रतिशत ड्यूटी लगाए जाने का प्रावधान है। सीसीएन द्वारा 20 लाख रुपए की प्रति महीने कर चोरी साबित होने के बाद इतनी ही राशि पेनल्टी के रुप में लगाई जाएगी। साथ ही कर भुगतान में जितने महीने की देर होगी। उस पर 18 प्रतिशत ब्याज लिए जाने का प्रावधान है। इसमें अगर तीन वर्षों की देर होती है तो पेनल्टी की रकम दो गुनी हो जाएगी।

विभागों के बंटवारे ने दिया मौका

जीएटी लागू होने के बाद जिस तरीके से स्टेट जीएसटी और सेंर्टल जीएसटी के बीच बंटवारा किया गया। उससे लक्जरी टैक्स समेत सर्विस टैक्स चोरी की संभावना बढ.गई। दोनों विभागों के बीच फर्मों का बंटवारा 50.50 के अनुपात में किया या। 1.50 करोड़ रुपए से अधिक के टर्न ओवर वाली कंपनियों को सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी के बीच विभाजित कर दिया गया।

वहीं 1.50 करोड़ रुपए से कम की कंपनियों को 90.10 के अनुपात में बांटा। स्टेट के पास मैन पावर अधिक होने के कारण 90 प्रतिशत कंपनियों का जिम्मा इन्हें दिया गया और 10 प्रतिशत सेंट्रल को मिला। सारी गड़बड़ी यहीं से हुई।

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