कार दुर्घटना में लोक गायक कार्की की मौत के बाद वायरल हो रहा है उनका लोकगीत ‘लाली हो लाली’

देहरादून : कुमाऊंनी उत्तराखंड के मशहूर और जनप्रिय लोकगायक और पॉपुलर कुमाऊंनी सिंगर पप्पू कार्की उर्फ पवेंद्र सिंह कार्की का कार हादसे में शनिवार को निधन हो गया है। अब उनका सबसे लोकप्रिय लोकगीत ‘लाली हो लाली’ के लिए पहचाना जाता है। उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर यह गाना वायरल हो गया है। इस गाने को सुन-सुन कर लोग-बाग पप्पू कार्की की स्मृतियों को ताजा कर रहे हैं।

पहाड़ी से गिर पड़ी थी कार : शनिवार की सुबह उत्तराखंड के हैड़ाखान रोड पर एक कार पहाड़ी से नीचे दूसरी सड़क पर जा गिरी। मिली जानकारी के मुताबिक, पहाड़ी सड़क हैड़ाखान रोड पर मुड़कुड़िया के पास से होकर एक कार जा रही थी। अचानक गाड़ी अनियंत्रित हो गई और वह पहाड़ी से नीचे दूसरी सड़क पर जा गिरी। इस हादसे में हादसे में तीन अन्य कलाकारों की मौत हो गई थी तथा दो गंभीर रूप से घायल।

इलाके में गम का माहौल : बता दें कि लोक गायक पप्पू कार्की इस इलाके में काफी मशहूर थे। इस वजह से उनकी मौत की खबर जैसे ही लोगों को मिली, पूरा इलाका गमगीन हो गया था। उनके साथ गोनियोरो गांव के 26 साल के राजेन्द्र गोनिया तथा 25 साल के पुष्कर गोनिया की भी मौत घटनास्थल पर ही हो गई। इस गाड़ी में उनके साथ दो और लोक कलाकार अजय आर्य व जुगल किशोर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहां इनका इलाज चल रहा है।

लौट रहे थे कार्यक्रम से : खबर के अनुसार ये पांचों गोनियरों गांव में कार्यक्रम देकर लौट रहे थे। गोनियरो गांव में युवा महोत्सव में चल रही रामलीला में भाग लेने ये गए थे। सुबह करीब 3 बजे तक इन लोगों ने युवा महोत्सव का लुत्फ उठाया। इसके बाद वे हल्द्वानी जा रहे थे।

मुख्यमंत्री व बॉलीवुड कलाकारों ने जताया शोक : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी ट्वीट कर इस कुमाऊंनी लोक गायक की मौत पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने लिखा कि इस युवा लोक गायक की मौत की खबर सुनकर गहरा धक्का लगा है। वह ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और इस दुख की बेला में ईश्वर उनके परिजनों को सहने की शक्ति प्रदान करे। उनकी निधन की खबर से बॉलीवुड भी शोक संतप्त है। बॉलीवुड कलाकार संजय मिश्रा ने उनके बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाने का जिम्मा लिया है।

16 साल की उम्र में रिकॉर्ड किया था पहला गाना : कार्की ने 16 साल की उम्र में 1998 में अपना पहला गीत रिकॉर्ड किया था। वह संगीत की शिक्षा प्रसार में यकीन रखते थे। पहाड़ों से पलायन को लेकर वह बेहद दुखी थे, जो उनके गीतों में भी झलकता है।

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