छत्तीसगढ़

प्रेग्नेंसी के बाद जिला प्रशासन देता है शगुन का तोहफा…

मदर किट में छेवारी लड्डू, बेबी किट में मस्किटो नेट

राजनांदगांव : नीति आयोग ने राजनांदगांव जिले के जिस नवाचार की खास प्रशंसा की, वो नवाचार है बेबी किट और मदर किट का। डिलीवरी के पश्चात नवजात शिशु के लिए बेबी किट और मदर किट का तोहफा जिला प्रशासन द्वारा दिया जाता है। बेबी किट में बेबी के लिए साबुन, तेल, पाउडर, तौलिया और ड्रेस शामिल होता है। वहीं मदर किट में माँ के लिए प्रोटीन पॉवडर एवं लड्डू होता है। जैसाकि परंपरा है शिशु के जन्म पर लोग रिश्तेदार, मित्रगण तोहफे देते हैं यह तोहफे शगुन के रूप में होते हैं जो शिशु की मंगलकामना के रूप में दिये जाते हैं। इसी मंगलकामना के साथ बेबी किट और मदर किट भी जिला प्रशासन के स्वास्थ्य अमले द्वारा दिया जाता है।

छत्तीसगढ़ में शिशु के जन्म पर माँ के लिए लड्डू बनाने की विशेष परंपरा है। इसे छेवारी लड्डू कहते हैं। इस लड्डू में विशेष तौर पर मेवे होते हैं। मेवे विटामिन का भरपूर स्रोत होते हैं और डिलीवरी के पश्चात सेहत की रिकवरी में काफी मददगार होते हैं। साथ ही यह लड्डू गुड़ से भी बनाया जाता है। गुड़ भी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में विशेष रूप से सहयोगी होता है। बेबी किट और मदर किट के प्रयोग के संबंध में जानकारी देते हुए सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया कि जिले में स्वास्थ्य सूचकांकों को बेहतर करने और संस्थागत प्रसव में वृद्धि के लिए नवाचारों पर विशेष बैठक कलेक्टर भीम सिंह ने ली थी।

बैठक में उन्होंने कहा था कि शिशु का जन्म किसी परिवार के लिए सबसे सुखद घटना होती है। इस अवसर पर रिश्तेदार और मित्र माता को और शिशु को शगुन प्रदान करते हैं। यदि जिला प्रशासन द्वारा भी कुछ ऐसा किया जाए तो बच्चे के माता-पिता एक सुखद अनुभव लेकर स्वास्थ्य केंद्र से घर जाएंगे। साथ ही अन्य लोगों को संस्थागत प्रसव के अपने इस सुखद अनुभव की जानकारी देंगे। इससे अन्य लोग भी संस्थागत प्रसव की ओर प्रेरित होंगे। इससे शत प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी (फिलहाल संस्थागत प्रसव 96 प्रतिशत है।) इसके पश्चात बेबी किट और मदर किट देने का निर्णय लिया गया।

प्रेग्नेंसी के पश्चात माता को प्रोटीन आहार की विशेष आवश्यकता होती है अतएव मदर किट में प्रोटीन पाउडर भी दिया गया। छेवारी लड्डू के साथ प्रोटीन पाउडर लेने से विटामिन, प्रोटीन एवं अन्य मिनरल्स की कमी पूरी हो जाती है और शिशु तथा माता के पोषण के लिए यह बढिय़ा पोषाहार होता है। फिलहाल राजनांदगांव जिले में अब तक 2262 माताओं तथा शिशुओं को यह बेबी किट तथा मदर किट दिया जा चुका है। इससे न केवल इनके पोषण और हाइजिन में सहायता मिलती है साथ ही पालक एक सुखद अहसास लेकर घर जाते हैं।

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