देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहे है अग्रवाल : बृजमोहन

रायपुर : मथुरा में आयोजित महाराजा अग्रसेन जयंती महोत्सव में प्रदेश के धर्मस्व,कृषि एवं सिंचाई मंत्री बृजमोहन अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर अग्रवाल समाज को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि समाज की सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुये हमे अब ज्यादा से ज्यादा स्कुल-कॉलेज खोलने की आवश्यकता है। ताकि शिक्षित और सांस्कारिक राष्ट्र के निर्माण में हम अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके। अपने आराध्य महाराज अग्रसेन से प्रेरणा लेकर सर्व समाज की सेवा का ध्येय हमारा सदा से रहा है। पुरातन काल से ही सामाजिक भवन,तीर्थ स्थलों में धर्मशालायें, बावलियां पूर्वज बनवाते रहे है। फलस्वरूप उस पुण्यकार्य का लाभ भी समाज को मिला है, आज हर क्षेत्र में हम अग्रणी है।

अग्रवाल ने कहा की दान की परंपरा को अग्रबंधु कायम रखे। माता लक्ष्मी हम अग्रवालों की कुलदेवी है। हम अच्छे कामों में जो भी योगदान देंगे निश्चित ही हमे उसका फल मिलेगा। उन्होंने समाज की महिला मंडल से कहा कि वे एक गरीब बस्ती गोद ले और वहां की महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई,पार्लर व् अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कराये ताकि वे स्वरोजगार अपनाकर अपनी गरीबी दूर कर सके।

उन्होंने कहा कि हमारे समाज में आज कुछ आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी है जिन्हें हमारे सहयोग की आवश्यकता है।ऐसे कमजोर परिवार के बच्चों की शिक्षा, उनकी बेटी का ब्याह और अच्छे स्वास्थ्य की चिंता हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्हें समाज के मुख्यधारा में जोड़ना हमारा कर्तव्य भी है। 
बीएसए डिग्री कॉलेज ग्राउंड में आयोजित इस महोत्सव में अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के अध्यक्ष एवं व्यापारी कल्याण बोर्ड गोपाल शरण गर्ग,उत्तरप्रदेश के खाद्य मंत्री अतुल गर्ग, ब्रज चिकित्सा संस्थान के अध्यक्ष देवीदास गर्ग, अग्रवाल महासभा के अध्यक्ष डॉ श्यामसुंदर बंसल, महामंत्री रविन्द अग्रवाल आदि उपस्थित थे।

भगवान अग्रसेन जी का एक ईट और एक रूपया का फार्मूला
बृजमोहन ने कहा कि अग्रसेन महाराज के राज्य में ऐसा दौर भी आया जब वहा के नागरिकों में गरीबी पैर पसारने लगी ।ऐसे दौर में वे रूप बदल कर जनता का हाल जानने निकले। एक रात वे एक गरीब परिवार में पहुंचे जहा एक साथ 11 सदस्य बैठकर भोजन कर रहे थे। अतिथि को बीच पाकर उन सभी लोगों ने अपनी रोटी के कुछ हिस्से अतिथि बनकर पहुंचे अग्रसेन महाराज को दिए। इसी घटना के बाद से अग्रसेन महाराज ने अपने राज्य में सभी लोगों द्वारा एक ईट और एक रूपया आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को प्रदान करने  की शुरुआत की थी।

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