कृषि वैज्ञानिकों ने धान की बीमारी का किया निरीक्षण

हिमांशु सिंह ठाकुर

पंडरिया / कुंडा।

जिला कबीरधाम से पहुंचे कृषि वैज्ञानिकों का टीम जिसमें डॉक्टर बी पी त्रिपाठी कृषि वैज्ञानिक कबीरधाम के प्रतिनिधित्व में एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी पंडरिया से दिलीप साहू भी निरीक्षण दल में शामिल थे । साथ ही साथ आज ही बायर कंपनी रायपुर के सीनियर एग्रोनॉमी मैनेजर सेंट्रल इंडिया एवं प्रवीण सिंह वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक रायपुर भी शामिल थे ।

उन्होंने विकासखंड पंडरिया के कुंडा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भरेवा पुरन में कई किसानों के खेतों में जाकर बायर हाइब्रिड धान 8433 डी टी बायर कंपनी के धान में ग्राम भरेवा पुरन में लगभग 200 एकड़ ,खम्हरिया में 25 एकड़ , ओडॉड़बरी में12 एकड़ एवं प्राण खैरा में लगभग 50 एकड़ के इस कंपनी के हाइब्रिड धान में यह बीमारी पाया गया । जिसका नाम पेनिकल बैक्टीरिया है जो सामान्यतया पानी गिरने के बाद एकाएक उमस भरी तापमान काफी अधिक हो जाने पर यह बीमारी हाइब्रिड धान में पाया जाता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह लोकल धान में भी हो सकता है लेकिन यहां लोकल धान में यह बीमारी नहीं पाया गया है।वैज्ञानिकों ने जांच उपरांत बताया कि यह बेक्टेरिया इंफेक्टेड है जो वातावरण में बढे तापमान के कम होने से यह बीमारी धान को सामान्यतया कोई क्षति पहुंचाए बिना ही स्वमेव समाप्त हो जाता है । सफिर भी कृषि वैज्ञानिक एवं बायर कंपनी रायपुर से पहुंचे राजेश दुबे सीनियर एग्रोनॉमी मैनेजर सेंट्रल इंडिया ने बताया कि चाहे तो किसान अति शीघ्र इसके रोकथाम एवं निदान के लिए स्ट्रेप्टोसेकलीं एवं सी ओ सी का छिड़काव कर इससे निजात पा सकते हैं ।

निरीक्षण दल में भरेवा से दुलेश्वर चंद्राकर किसान संगठन अध्यक्ष जिला कबीरधाम प्राण खैरा से वासुदेव चंद्राकर, भरेवा से ही यशवंत चंद्राकर किसान नेता, एवं प्रभात चंद्राकर प्रगतिशील किसान, प्रदीप चंद्राकर, खम्हरिया से अतुल चंद्राकर, सुकली गोविंद से विजय चंद्राकर अनिल सवैया उपस्थित थे.

जिन्होंने शुरू से अंतिम तक धान में होने वाले इस फंगल बीमारी के बारे में जानकारी प्राप्त किया एवं उनके रोकथाम हेतु वैज्ञानिकों के द्वारा बताए गए उपाय को समझा गया । जिसमें सभी गाँव के ग्रमीण भी उपस्थित थे.

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