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सवाल के नाम पर बवाल करने की फिराक में अमित

रायपुर : बस्तर में जैसे ही कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बिस्तर जमाया, अमित जोगी को ये बात नागवार गुजरी। उन्होंने नगरनार में एक मंच बनवाकर उसी पर राहुल गांधी को आमंत्रित किया है, ताकि बस्तरवासियों की समस्याओं को लेकर कुछ तीखे सवाल पूछ सकें। शुक्रवार को मरवाही विधायक अमित जोगी ने सागौन बंगले में पत्रकारों से कहा कि दिल्ली के नेताओं का ये चार- चार साल वाला बस्तर टूरिज्म पैकेज अब नहीं चलेगा। बस्तरवासी त्रस्त हो चुके हैं और इसलिए अब वो भाषण नहीं जवाब चाहते हैं।।
मीडिया ने सवाल किया कि, जब पिछली बार राहुल गांधी बस्तर आए थे तो उन्होंने आदिवासियों से कुछ वादे किए थे, आप राज्य के आदिवासियों के युवा नेता हैं, आपने उसको पूरा करने के लिए क्या किया? थोड़ी देर चुप रहने के बाद अमित जोगी ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि माफ कीजिएगा हम आपका सवाल समझ नहीं पाए। ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि वे राहुल गांधी से भला क्या पूछेंगे सवाल जो खुद ही नहीं दे पाए जवाब ? असलियत तो यही है कि आदिवासियों के लिए जैसे राहुल गांधी वैसे ही अमित जोगी। न इन्होंने कुछ किया और न उन्होंने, कड़वी सच्चाई ये है कि पिछली बार जब राहुल गांधी बस्तर आए थे तो उस समय यही अमित जोगी कांग्रेस के विधायक थे। अब सवाल के नाम पर अमित जोगी बवाल करने की फिराक में हैं। देखना तो यही होगा कि राहुल गांधी उनके सवालों का क्या करते हैं ? उन्होंने कहा कि बस्तर में बहुत सी समस्याएं है,जिसमें से सबसे ज्वलंत समस्याएं नक्सली, नौकरी, नदी और नगरनार इस्पात संयंत्र है। 29 जुलाई को बस्तर में बस्तरवासियों के पांच सवालों का जवाब मांगने एक मंच बनाया जायेगा। उस मंच राहुल गांधी से आने का अनुरोध किया जायेगा।

क्या हैं वो 5 सवाल

  1. 12 अप्रैल 2013 को कांग्रेस ने नगरनार इस्पात संयंत्र का निजीकरण करने ग्लोबल टेंडर क्यों बुलाया, क्यों यूपीए सरकार ने निजीकरण को स्वीकृति दी और क्यों राहुल गांधी ये सब देखते हुए चुप रहे?
  2. क्यों नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण का राहुल गांधी ने आज तक विरोध नहीं किया,क्यों प्रधानमंत्री को पत्र नहीं लिखा,क्यों लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया ?
  3. लौह अयस्क बस्तर का, जमीन बस्तर की तो एनएमडीसी का मुख्यालय हैदराबाद से बस्तर लाया जाना चाहिए या नहीं ?
  4. बस्तरवासियों को डराने और नुक्सान पहुंचाने के उद्देश्य से, बस्तर की जीवनदायिनी इन्द्रावती नदी पर बने जोरानाला स्ट्रक्चर को सब्बल, गैती लेकर तोडऩे वाले ओडिशा के कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर मांझी, विधायक ताराचंद वाहिनीपति, विधायक रघुराम परल, विधायक कैलाशचंद कुलेशिया, एवं कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के विरुद्ध श्री राहुल गांधी ने अब तक क्यों कार्यवही नहीं की ?
  5. पोलावरम पर केवल आंध्रा का साथ और पैसा क्यों दिया? क्यों छत्तीसगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार किया, क्यों बस्तर में बिना जनसुनवाई किये बैगर पोलावरम परियोजना को मंजूरी दी, पोलावरम की पैरवी करते हो लेकिन आज तक बस्तर के दो लाख प्रभावितों की बात क्यों नहीं की,क्यों आपके छत्तीसगढ़ के विधायकों ने पोलावरम के विरोध में लाये गए संकल्प का समर्थन नहीं किया ?
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