छत्तीसगढ़ के बायो फ्यूल से 26 जनवरी को दिल्ली में हवाई करतब

रायपुर।

छत्तीसगढ़ में उत्पादित रतनजोत, करंज और पलाश से तैयार बायो फ्यूल अब देश की आन-बान- शान में उपयोग होगा। इस वर्ष का गणतंत्र दिवस प्रदेशवासियों के लिए खास है, क्योंकि 26 जनवरी को दिल्ली राजपथ पर होने वाले एयर शो में प्रदेश में निर्मित बायो फ्यूल से हवाई में करतब करते एयर फोर्स के फाइटर प्लेन दिखाई देंगे।

आखिरकार प्रदेश के किसानों की मेहनत कारगर होगी। प्रदेश की महत्वपूर्ण योजना बायो फ्यूल को भी पंख लग गए हैं। छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों ने बताया कि एयरफोर्स के अफसर तीन हजार लीटर बायो फ्यूल देहरादून के बेस कैंप ले गए हैं। वहां से चंडीगढ़ बैस कैंप ले जाया जाएगा। इसके बाद 26 जनवरी को बायो फ्यूल से एयर शो दिखाया जाएगा।

क्या है बायो फ्यूल : बायोफ्यूल जैट्रोफा (रतनजोत, करंज और पलाश) के बीजों का उत्पाद है। जैट्रोपा यूफोर्बियेसी परिवार का सदस्य है और अमेरिकी मूल का है। स्थानीय भाषा में इसे बरगंडी भी कहते हैं। जैट्रोपा का पौधा तीन-चार मीटर ऊंचा होता है और प्रतिकूल मौसम और विपरीत जलवायु में भी फलता-फूलता है।

इन जिलों में हो रहा उत्पादन

प्रदेश में प्रतिदिन तीन टन ऑयल का उत्पादन होता है। वहीं जिलों से रतनजोत और करंज के बीच को एकत्रित करने के लिए बिलासपुर, कवर्धा, मुंगेली, जांजगीर आदि जिलों में किसानों का सशक्त समूह गठित किया गया है। सरकार किसानों से 13-14 रुपये प्रतिकिलो के दाम पर बीज खरीदती है। चार किलो बीज से एक किलो तेल निकलता है।

केंद्र सरकार ने इसी साल चार जून को जैव ईंधन नीति 2018 घोषित की। 10 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व बायोफ्यूल दिवस पर इस नीति को राष्ट्र को समर्पित किया। भारत सरकार ने इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों की कमेटी बनाई है, जिसमें छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया है।

प्रदेश में निर्मित बायो फ्यूल का उपयोग एयर फोर्स कर रही है। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में होने वाले एयर शो में बायो फ्यूल का उपयोग किया जाएगा। एयर फोर्स के अफसर तीन हजार लीटर बायो फ्यूल देहरादून बैस कैंप ले जा चुके हैं।
– सुमित सरकार, प्रोजेक्ट ऑफिसर छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल डेवलपमेंट अथॉरिटी

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