10 स्वदेशी लेजर एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदेगी वायुसेना, जानें खासियत

वायुसेना ने आरएफआई में कहा है कि वह स्वदेशी माध्यम से 10 सीयूएएस की खरीद करना चाहता है।

DELHI: देश की सेना अब स्वदेशी रक्षा हथियारों से लैस होगी। इसके लिए भारतीय वायु सेना ने 10 एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदेगी, जो दुश्मन के ड्रोन का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करने में सक्षम हों। साथ ही सिस्टम में ड्रोन को मार गिराने के लिए लेजर निर्देशित ऊर्जा हथियार (लेजर-डीईडब्ल्यू) की तकनीक अवश्य होनी चाहिए। इसी के तहत वायुसेना ने भारतीय विक्रेताओं के लिए टेंडर जारी करके सूचनाएं मांगी हैं।

भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने विशेष रूप से भारतीय विक्रेताओं से 10 काउंटर मानव रहित विमान प्रणाली (सीयूएएस) खरीदने की योजना बनाई है, जिसे आम बोलचाल में एंटी-ड्रोन सिस्टम के रूप में जाना जाता है। बोलियां आमंत्रित करने के लिए सूचना के लिए अनुरोध (आरएफआई) जारी किया गया है।

वायुसेना ने बताया, कैसा हो एंटी-ड्रोन सिस्टम

वायुसेना ने आरएफआई में कहा है कि वह स्वदेशी माध्यम से 10 सीयूएएस की खरीद करना चाहता है। वायुसेना को ऐसे एंटी-ड्रोन सिस्टम चाहिए, जो दुश्मन के ड्रोन का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करने में सक्षम हों। साथ ही सिस्टम में ड्रोन को मार गिराने के लिए लेजर निर्देशित ऊर्जा हथियार (लेजर-डीईडब्ल्यू) तकनीक अवश्य होनी चाहिए। आरएफआई के अनुसार एंटी-ड्रोन सिस्टम की बुनियादी विशेषताओं में ‘मल्टी-सेंसर, मल्टीकिल सॉल्यूशन’ का प्रावधान शामिल है, जो ‘नो-फ्लाई’ जोन में प्रभावी हों और आसपास के पर्यावरण को न्यूनतम क्षति पहुंचाए। यह सीयूएएस क्रॉस कंट्री क्षमता वाले स्वदेशी विद्युत आपूर्ति प्रणालियों द्वारा संचालित किये जा सके और इन्हें हवाई और सड़क मार्ग से ले जाने में आसानी हो।

सिस्टम में हो ‘सॉफ्ट किल’ और ‘हार्ड किल’

आरएफआई में कहा गया है कि सिस्टम में यूएवी का पता लगाने के लिए एक चरणबद्ध सारणी रडार होना चाहिए, यूएवी की फ्रीक्वेंसी का पता लगाने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसर और दुश्मन के यूएवी का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रो ऑप्टिकल और इंफ्रारेड प्रणाली होनी चाहिए। इसमें सॉफ्ट किल विकल्प होना चाहिए, जिसमें ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट जैमर सिस्टम और आरएफ जैमर और हार्ड किल ऑप्शन (लेजर-डीईडब्ल्यू) शामिल हो सकते हैं। सॉफ्ट किल का मतलब ड्रोन के संचार या नेविगेशन संकेतों को जाम करना और ‘हार्ड किल’ का मतलब ड्रोन को पूरी तरह नष्ट करके मार गिराना है।

बता दें कि हाल ही में जम्मू हवाई अड्डे पर 26/27 जून की रात को हुए ड्रोन अटैक हुआ था, जिसके बाद से वायुसेना सतर्क हो गई है और अपनी रक्षा प्रणाली को और मजबूती देने में लगी है।

नौसेना इजरायल से खरीद रही एंटी-ड्रोन सिस्टम स्मैश

गौरतलब हो कि नौसेना ने पहले ही इजरायली एंटी-ड्रोन सिस्टम स्मैश 2,000 प्लस के लिए ऑर्डर दे रखा है, जो असॉल्ट राइफल्स को स्मार्ट हथियारों में बदल देता है, जिससे फर्स्ट-शॉट हिट और एंटी-ड्रोन ऑपरेशन सक्षम होते हैं। ये सिस्टम शत्रुतापूर्ण ड्रोन और मानव रहित हवाई प्रणालियों का पता लगाते हैं और उन्हें रोकते हैं। इनका उपयोग खुफिया जानकारी एकत्र करने या प्रतिबंधित सामग्री की तस्करी या विस्फोटकों को तैनात करने के लिए किया जा सकता है। सीयूएएस को सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है।

Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button