एअर इंडिया को मिलेगी नई मंजिल, टाटा ग्रुप और स्पाइसजेट ने लगाई आखिरी बोली

अनगिनत मुसाफिरों को उनकी मंजिल तक पहुंचानी वाली एयर इंडिया को बहुत जल्द अपनी नई मंजिल मिलने वाली है और बहुत मुमकिन है कि एअर इंडिया की फिर से घर वापसी हो जाए. सरकार ने एअर इंडिया को बेचने के लिए बोली मंगाई थी, जिसकी मियाद बुधवार को खत्म हो गई. टाटा ग्रुप और स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने एअर इंडिया को खरीदने के लिए आखिरी बोली लगाई है.

क्या होगी एअर इंडिया की घर वापसी ?

सूत्रों के मुताबिक, टाटा संस का दावा ज्यादा मजबूत है. इसीलिए कहा जा रहा है कि एअर इंडिया की घर वापसी हो सकती है.

एअर इंडिया को 1932 में टाटा ग्रुप ने ही शुरू किया था.

टाटा समूह के जे.आर.डी. टाटा इसके फाउंडर थे.

तब एअर इंडिया का नाम टाटा एअर सर्विस रखा गया था.

1938 तक कंपनी ने अपनी घरेलू उड़ानें शुरू कर दी थीं.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद इसे सरकारी कंपनी बना दिया गया.

आजादी के बाद सरकार ने इसमें 49% हिस्सेदारी खरीदी.

इंडियन एयरलाइंस में विलय के बाद कभी नेट प्रॉफिट में नहीं रही एयर इंडिया

साल 2007 में इंडियन एयरलाइंस में विलय के बाद से एअर इंडिया कभी नेट प्रॉफिट में नहीं रही है. एअर इंडिया में मार्च 2021 में खत्म तिमाही में लगभग 10,000 करोड़ रुपए का घाटा होने की आशंका जताई गई. कंपनी पर 31 मार्च 2019 तक कुल 60,074 करोड़ रुपए का कर्ज था. लेकिन अब जो भी एअर इंडिया को खरीदेगा, उसे इसमें से 23,286.5 करोड़ रुपए के कर्ज का बोझ उठाना होगा.

मौजूदा समय में एअर इंडिया देश में 4400 और विदेशों में 1800 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट को कंट्रोल करती है.

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