झाडि़यों से एके-47 और 30 जिंदा कारतूस बरामद

अंकित मिंज

बिलासपुर। पारिवारिक दुश्मनी का बदला लेने के जुनून में दंतेवाड़ा के बैलाडीला स्थित बचेली एनएमडीसी खदान में पदस्थ सीआईएसएफ के जवान ने एके 47 राइफल और 30 जिंदा कारतूस चोरी किया और सीपत एनटीपीसी के पीछे सीआईएसएफ कैंप के पीछे झाडियों के बीच छिपा दिया।

शनिवार को खुलासा होने पर सीआईएसएफ के अधिकारियों ने राइफल बरामद कर आरोपी को अपने साथ ले गए हैं। दंतेवाड़ा के बैलाडीला ग्राम बचेली स्थित सीआईएसएफ कैंप के एसआई राजीव राजपूत ने बताया कि तमिलनाडु निवासी पी सोरेन जी (30) सीआईएसएफ में आरक्षक है।

उसकी तैनाती दंंतेवाड़ा बैलाडीला अंतर्गत ग्राम बचेली स्थित एनएमडीसी की खदान में हैं। तीन दिन पूर्व सीआईएसएफ कैंप से पी सोरेनजी के साथ 3 अन्य आरक्षक छुट्टी मिली थी। आरक्षकों के कैंप से निकलने के बाद उनके दिए जाने वाले हथियारों की गिनती की गई।

जिसमें 1 एके 47 राइफल और 30 जिंदा कारतूस नहीं थे। कर्मचारियों ने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी। कैप में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई, जिसमें पी सोरेनजी के साथ 3 आरक्षक सामान लेकर बाहर जाते दिखे थे।

सभी आरक्षकों को वापस कैंप बुलवाया गया और पूछताछ की गई। सभी ने हथियार के संबंध में अलग-अलग जानकारी दी थी। आरक्षक पी सोरेनजी के बैग की तलाशी लेने पर गन का ऑयल और साफ करने का कपड़ा मिला। सख्ती से पूछताछ करने पर उसने राइफल चोरी करना स्वीकार कर लिया।

कड़ाई से पूछताछ में बताया सीपत में छिपाई राइफल

आरक्षक पी सोरेनजी ने बताया कि वह बचेली से पहले एनटीपीसी सीपत में पदस्थ था। वहां उसकी मुलाकात एनटीपीसी के एक ठेकेदार से हुई थी। उसने राइफल ठेकेदार को बेच दी है।

अधिकारियों ने फिर से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने राइफल और जिंदा कारतूस को सीपत एनटीपीसी सीआईएसएफ कैंप के पीछे झाडि़यों में छिपाना स्वीकार किया। शनिवार को अधिकारी उसे लेकर सीपत एनटीपीसी पहुंचे। यहां सीपत पुलिस की मदद से अधिकारियों ने राइफल और जिंदा कारतूस बरामद किया।

तमिलनाडु में दुश्मनों से बदला लेने की योजना

आरोपी आरक्षक ने अधिकारियों को बताया कि तामिलनाडु में उसकी पारिवारिक दुश्मनों से बदला लेने के लिए उसने राइफल चोरी की और 10 जनवरी को राइफल लेकर सीपत स्थित बैंक में काम का बहाना बनाकर आया था। तभी उसे फिर से बचेली बुलवाया गया। उसने राइफल सीपत में झाडि़यों के बीच छिपा दी थी।

पहले भी हो चुका है बर्खास्त

आरोपी आरक्षक सीआईएसएफ में नौकरी करने से पहले बीएसएफ में आरक्षक के पद पर पदस्थ था। सन 2011 में उसे आचरण के विरूद्ध कार्य करने पर नौकरी से निकाल दिया गया था। इस बात को उसने छिपाकर सन 2010 में सीआईएसएफ में भर्ती हो गया था।

उसके फोन रिकार्ड खंगालने पर कई महिलाओं और युवतियों से बातचीत करने के सबूत मिले हैं। साथ ही उसके नाम पर कई बैंकों में खाते हैं, जिसमें आय से अधिक रकम जमा होने और निकालने के रिकार्ड हैं।

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