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अखिलेश राज में हुईं UPPSC भर्तियों की योगी कराएँगे CBI जांच

अखिलेश राज में हुईं UPPSC भर्तियों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ CBI जांच करवाएंगे.योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की 2012 से हुई सभी भर्तियों की सीबीआई जांच कराने का एलान किया है।

इस एलान से पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में आयोग में हुई सभी भर्तियां जांच के दायरे में आ गई हैं। सीएम ने कहा-प्रदेश के नौजवानों के साथ अन्याय करने वाले इस जांच के कठघरे में आएंगे। उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

सीएम योगी ने विधानसभा में 2017-18 के आम बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए बुधवार को यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में ऐसी कोई नियुक्ति शायद ही हुई हो जिस पर अंगुली न उठी हो। राज्य लोक सेवा आयोग की विश्वसनीयता को दांव पर लगा दिया गया।

हमारी सरकार ने 2012 से अब तक की सभी भर्तियों की सीबीआई जांच कराने का फैसला कर लिया है। हरियाणा के शिक्षक भर्ती घोटाले का जिक्र करते हुए कहा- वहां एक नेता पिछले दस साल से जेल में हैं। ऐसी स्थिति यूपी में भी आ सकती है।

गौरतलब है कि सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में 700 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल की।

25 हजार से ज्यादा भर्तियों पर लटकी तलवार

अप्रैल 2013 में अध्यक्ष बनाए जाने के बाद डॉ. अनिल यादव ने नियमों की मनमाने तरीके से व्याख्या करके सीधी भर्ती सहित अन्य पदों को भरने का काम किया। इसमें सीधी भर्ती के सात हजार पदों जिसमें डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसरों की नियुक्तियां शामिल हैं।

इसके साथ 2012 से अब तक हुईं भर्तियों की सीबीआई जांच के दायरे में नौ से अधिक भर्तियां और 25 हजार से अधिक पद होंगे। इनमें सिर्फ पीसीएस के ही करीब तीन हजार और पीसीएस-जे के एक हजार पद शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 1.5 लाख पुलिस कर्मियों के पद खाली होने के बावजूद बेरोजगार युवाओं की भर्ती न करने के लिए भी पूर्ववर्ती सपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

योगी ने कहा-उनकी मंशा साफ नहीं थी, इसलिए हाईकोर्ट व सुप्रीमकोर्ट ने भर्तियों पर रोक लगा रखी थी। प्रदेश के बेरोजगार नौजवान उनकी कारगुजारी से त्रस्त थे।

हमारी सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में बिना जाति-महजब के भेदभाव के पारदर्शी भर्ती करने का हलफनामा दिया है। भर्ती की इजाजत मिल गई है। पांच साल में 1.5 लाख पुलिस जवानों की भर्ती की जाएगी। इनमें 32 हजार की इसी साल होगी।

मेरिट के कागज जला देने से कोई बच नहीं पाएगा
मुख्यमंत्री ने कहा, पता चला है कि मेरिट के पुराने कागज जला दिए गए हैं। कॉपियां जला दी गईं। पर, कागज और कॉपियां जला देने से कोई बच नहीं पाएगा।

तत्कालीन चेयरमैन अनिल यादव पर शिकंजा कसना तय

अखिलेश सरकार के दौरान यूपी लोक सेवा आयोग की भर्तियों पर सवाल उठते रहे हैं। पीसीएस समेत तमाम भर्तियों में जाति विशेष के अभ्यर्थियों को तरजीह दिए जाने से विवाद खड़ा हो गया था।

अनिल यादव पर मनमानियों के खूब आरोप लगे। सीबीआई जांच होने से अनिल यादव पर शिकंजा कस सकता है।

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