सभी पात्र हितग्राहियों को वन अधिकार मिलना सुनिश्चित हो : कमिश्नर

हितेश दीक्षित:

गरियाबंद: अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी वन अधिकारों के मान्यता अधिनियम 2006, नियम 2007 एवं यथा संशोधित नियम 2012 के क्रियान्वयन हेतु आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें वन अधिकार मान्यता से संबंधित महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

वनों पर आश्रितों को अधिकार पत्र दिया जाए

कार्यशाला में रायपुर संभाग के आयुक्त जी.आर. चुरेन्द्र ने सम्बोधित करते हुए कहा कि अधिनियम के तहत सभी पात्र हितग्राहियों को वन अधिकार पत्र मिलना सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि जो वनवासी वन भूमि में 13 दिसम्बर 2005 के पूर्व से काबिज हो तथा जीविका के वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु वनों पर आश्रित हो उसे वन अधिकार पत्र दिया जाए,

साथ ही सामुदायिक वन अधिकार पत्र के लिए भी विशेष प्रयास किया जाए। कार्यशाला में कलेक्टर श्याम धावड़े, जिला पंचायत सीईओ आर.के. खुटे, वनमण्डलाधिकारी राजेश पाण्डेय एवं जिला पंचायत के उपाध्यक्ष पारस ठाकुर,

जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम, जनपद पंचायत के अध्यक्षगण, स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधि एवं कमार, भुंजिया तथा आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि और संबंधित शासकीय अधिकारी मौजूद थे।

पावर पाईंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से चर्चा

कार्यशाला में अधिनियम के तहत महत्वपूर्ण परिभाषाएं, अधिकार तथा ग्राम स्तरीय समिति एवं उनके सदस्यों द्वारा किये जाने वाले कार्य, पात्र एवं अपात्र का निर्धारण करना, दावों के सत्यापन प्रक्रिया ग्रामसभा की कार्यवाही तथा शासकीय विभागों की भूमिका पर पावर पाईंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से चर्चा की गई।

शासन द्वारा जारी निर्देश का अध्ययन करें

कमिश्नर चुरेन्द्र ने कहा कि इस संबंध में शासन द्वारा जो निर्देश जारी हुए है उन्हें शासकीय अधिकारी अपने पास रखे तथा उसका अध्ययन करें। इस प्रक्रिया में की जाने वाली कार्यवाही का क्रम निर्धारण करें। उन्होंने कहा कि वन भूमि में रहने वाले लोगों के माध्यम से वन, खनिज, जल एवं भू-सम्पदा को बचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जिस भूमि का अधिकार पत्र दिया गया है, उसमें लगे पेड़ को काटे नहीं, बल्कि उसे बचायें। उन्होंने वन, राजस्व व आदिवासी विकास विभाग को इस अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए समुदाय की सहभागिता को बढ़ाने के निर्देश दिये, साथ ही पूर्व में जारी प्रमाण पत्र का दुरूस्तीकरण, बी-1, खसरा का आबंटन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये।

कमिश्नर ने जिले में एक निश्चित कार्यक्रम बनाकर इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं एवं समुदाय के लोगों से आग्रह भी किया। कलेक्टर धावड़े ने बताया कि जिले में दिसम्बर 2018 तक की स्थिति में कुल 20 हजार 616 वन अधिकार पत्र वितरित किये गये हैं।

कुल निरस्त आवेदनों में से 1383 आवेदन पुनः प्रक्रियाधीन हैं। उन्होंने बताया कि कुल 20 हजार ऋण पुस्तिका वितरित किये जा चुके हैं, जिसमें 22274.84 हेक्टेयर क्षेत्र भूमि का आंबटन किया गया है। आंबटित भूमि में भूमि सुधार, खाद, बीज वितरण, कृषि यंत्र एवं सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराया गया है।

धावड़े ने यह भी कहा कि निरस्तीकरण किये गये आवेदनों का पुनः परीक्षण किया जायेगा, इसके लिए आवेदनों को ग्राम स्तरीय समिति में प्रेषित किया जायेगा तथा परीक्षण के पश्चात पात्र हितग्राहियों की सूची ग्रामसभा से अनुमोदन कराकर वन अधिकार पत्र दिये जायेंगे। उन्होंने इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिये हैं। कार्य शाला में स्वयंसेवी संस्थाओं एवं समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा भी महत्वपूर्ण सुझाव रखे गये।

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