नोटों की शक्ल में सामने आ रहे पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर लगे इल्ज़ाम

देशमुख के कहने पर मुंबई के क़रीब 60 बारों के संपर्क में था सचिन वाज़े

मुंबई:प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के घर पर छापेमारी की. ईडी ने अनिल देशमुख के नागपुर और मुंबई के वर्ली वाले घर पर छापेमारी की. ईडी की ओर से नागपुर और मुंबई में अलग-अलग छापेमारी की जा रही हैं.

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की ओर से लगाए गए आरोप के बाद अनिल देशमुख पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया था, जिसको लेकर ईडी लगातार उनसे पूछताछ कर रही है. इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय ने तलोजा जेल में पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे का भी बयान दर्ज किया है. 

करीब तीन महीने पहले मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्वनर परमबीर सिंह ने एक खत लिखा था. जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर कुछ पुलिस वालों की मदद से उगाही का इल्जाम लगाया था. जब ईडी ने मामले की जांच शुरू की तो सारा हिसाब-किताब सामने आ गया.

मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह ने एंटीलिया मामले के दौरान एक लेटर बम फोड़ा था. जिसके धमाके की ज़द में आए थे सीधे राज्य के गृहमंत्री. इस ख़त में एक पुलिस कमिश्नर ने ये इल्ज़ाम लगाया था कि कैसे पुलिस अफ़सरों का इस्तेमाल कर गृहमंत्री हर महीने करोड़ों रुपये की उगाही का हिसाब किताब लगा रहे थे.

इस लेटर बम के फूटने के करीब तीन महीने बाद अब किश्तों में सचमुच हिसाब किताब सामने आने लगा है. जी हां, महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर जो इल्ज़ाम तब के मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने लगाए थे, वो अब नोटों की शक्ल में सामने आ रहे हैं.

अफसोस मगर सच ये है कि परमबीर सिंह ने ये तो लेटर बम फोड़ने में देर कर दी या लेटर लिखने में. या फिर ये भी हो सकता है कि सच उन्हें पहले से पता था, सच उगलने में वक़्त ले लिया. परमबीर सिंह ने ये ख़त मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से विदाई के दो दिन बाद लिखा था.

18 मार्च को उन्हें कमिश्नर की कुर्सी छोड़ने को कहा गया और 20 मार्च को परमबीर सिंह ने ये लेटर बम फोड़ा. पर कमाल देखिए इस लेटर बम के फूटने से पहले ही सचिन वाज़े किश्तों में अलग-अलग बार से कई करोड़ रुपये वसूल कर गृहमंत्री के क़रीबियों के ज़रिए उनकी झोली में डाल चुके थे.

ये इल्ज़ाम हम नहीं लगा रहे हैं. बल्कि ये ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की अब तक की जांच में सामने आया है. ईडी सूत्रों के मुताबिक परमबीर सिंह ने ख़त 20 मार्च को लिखा, जबकि सचिन वाज़े दिसंबर 2020 से ही वसूली के काम में जुट गया था.

सूत्रों के मुताबिक ईडी ने जांच को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले उन पुलिस अफ़सरों को खंगालने का फैसला किया, जिनके दामन पर देशमुख वसूली का दाग़ लगा चुके थे. इन दाग़ी पुलिसवालों के ज़रिए वसूली के तार बार तक पहुंचे और बार से उगाही के कारोबार तक. धीरे-धीरे हिसाब किताब सामने आने लगा.

करीब तीन महीने की मेहनत के बाद ईडी ने सचिन वाज़े से लेकर उन तमाम पुलिस अफ़सरों को खंगालना शुरू किया, जिन पर अनिल देशमुख के लिए उगाही के इल्ज़ाम थे. ईडी सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान दो पुलिसवाले एक तरह से एजेंसी के गवाह बन गए. उनकी गवाही और सुराग से जांच में काफ़ी मदद मिली.

जांच के दौरान पता चला कि सचिन वाज़े ने दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच मुंबई के अलग-अलग बार से करीब 4 करोड़ 70 लाख रुपये की उगाही की थी. सचिन वाज़े ने ये पैसे बाद में अनिल देशमुख के निजी सहायक के ज़रिए देशमुख तक पहुंचा दिए.

ईडी की जांच के दौरान ये बात सामने आई कि परमबीर सिंह ने उगाही के लिए अनिल देशमुख के खिलाफ़ जो ख़त लिखा था, वो हवाई नहीं था. ईडी सूत्रों के मुताबिक गृहमंत्री रहते हुए अनिल देशमुख ने मुंबई पुलिस के चुनिंदा अफसरों को बाक़ायदा डांस बार से हर महीने उगाही के लिए टार्गेट दे रखा था. इन अफसरों में सचिन वाज़े भी शामिल था.

सूत्रों के मुताबिक इडी की जांच में अब तक पता चला है कि सचिन वाज़े देशमुख के कहने पर मुंबई के क़रीब 60 बारों के संपर्क में था. वो बार से सीधे खुद उगाही नहीं करता था. बल्कि बार मालिक और प्रबंधक जया पुजारी और महेश शेट्टी जैसे लोगों के ज़रिए ही वो पैसे वसूलता था.

सूत्रों के मुताबिक दिसंबर, 2020 में गुड लक मनी के रूप में इन बार मालिकों ने 40 लाख रुपये सचिन वाज़े को दिए थे. इसके अलावा मुंबई पुलिस कमिश्नरेट जोन-1 से जोन-7 के अधिकार क्षेत्र में आने वाले बार की ओर से जनवरी और फरवरी, 2021 में सचिन वाजे को 1 करोड़ 64 लाख रुपये दिए गए.

मुंबई पुलिस कमिश्नरेट के जोन-8 से जोन-12 के अधिकार क्षेत्र में आनेवाले बार की तरफ से जनवरी और फरवरी, 2021 के महीने में सचिन वाजे को 2 करोड़ 66 लाख रुपये दिए गए. सचिन वाजे ने बार मालिकों और मैनेजरों को बताया था कि वसूले गए पैसे गृहमंत्री अनिल देशमुख, मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच और सोशल सर्विस ब्रांच को जाएगी.

ईडी सूत्रों के मुताबिक मुंबई पुलिस की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट के प्रमुख के रूप में सचिन वाजे ने बार मालिकों से कथित तौर पर 4.70 करोड़ रुपये इकट्ठे किए और उन्हें तय वक़्त के बाद भी यानी देर रात तक बार चलाने की इजाज़त दे दी.

19 और 21 मई को ईडी के अधिकारियों ने मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत तलोजा जेल में सचिन वाजे के बयान भी दर्ज किए, जिसमें उसने कथित तौर पर दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच बार मालिकों से 4.70 करोड़ रुपये वसूलने की बात कबूल की. उसने ईडी के अफसरों को ये भी बताया कि इकट्ठा किए गए रुपये अनिल देशमुख के निजी सहायक कुंदन संभाजी शिंदे को खुद गृहमंत्री अनिल देशमुख के कहने पर जनवरी और फरवरी के महीने में दो किश्तों में सौंपी गई थी.

ईडी का दावा है कि सचिन वाजे के आरोपों की पुष्टि दो और पुलिस अफ़सरों ने की है, जो अब इस मामले में गवाह बनाए गए हैं. ईडी को कुछ ऐसे दस्तावेज़ भी मिले हैं जिनके मुताबिक देशमुख परिवार की तरफ से चलाए जा रहे नागपुर चैरिटेबल ट्रस्ट श्री साईं शिक्षण संस्थान ने भी वसूली के रुपये दान के तौर पर स्वीकार किए. जांच एजेंसी का दावा है कि हाल ही में ट्रस्ट को दिल्ली स्थित शेल कंपनियों के ज़रिए दान के नाम पर 4 करोड़ 18 लाख रुपये मिले

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