भूस्खलन ने छीन लिया सबकुछ, मुआवजे में मिले महज 200 रुपये

इस जमीन से 65 परिवारों की रोजी-रोटी चलती थी

भूस्खलन ने छीन लिया सबकुछ, मुआवजे में मिले महज 200 रुपये

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में साल 2013 में भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई थी। कई लोगों के घर पूरी तरह उजड़ गए और कुछ को अपनों से बिछड़ना पड़ा था। यह जख्म उस वक्त और हरा हो गया जब सरकार अधिकारियों ने मुआवजे के नाम पर उनके साथ क्रूर मजाक किया। इन पीड़ितों में से कुछ को मुआवजे के नाम पर महज 200 रुपये दिए गए।

18-19 जुलाई की आधी रात को अल्मोड़ा के दूरवर्ती गांव भैसियाछाना में सभी लोग गहरी नींद में थे कि अचानक जबर्दस्त भूस्खलन हुआ। इस कुदरती आपदा में 12 घर पूरी तरह ढह गए और 2.5 हेक्टेयर जमीन बर्बाद हो गई। इस जमीन से 65 परिवारों की रोजी-रोटी चलती थी। इस आपदा ने पीड़ितों को झकझोर कर रख दिया।

नहीं छोड़ पाए घर का मोह
इस घटना के चार साल बीत चुके हैं, लेकिन अब भी आपदा से प्रभावित लोगों को सरकार की तरफ से उचित मुआवजा का इंतजार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भूस्खलन के बाद कई परिवार ये इलाके को छोड़ चले गए लेकिन 12 परिवार अपने घर का मोह नहीं छोड़ पाए। भैसियाछाना गांव के प्रधान जगत सिंह बानी ने कहा कि 2010 में ही पहाड़ में दरार दिखने लगे थे और 2013 में भूस्खलन ने हमें तबाह कर दिया।

स्थानीय निवासी 27 वर्षीय पप्पू राम ने बताया, ‘हमारे घर पूरी तरह बर्बाद हो गए और हमारे पास जमीन भी नहीं है। सरकार ने भी हमारे लिए कुछ नहीं किया। हमलोगों को मुआवजे के नाम पर महज 200 रुपये मिले। कुछ लोगों को 400 रुपये दिए गए।’

इस मामले में अल्मोड़ा के एसडीएम विवेक राय ने बताया कि एनडीआरएफ नॉर्म्स के मुताबिक ही मुआवजे बांटे गए। हर पीड़ित परिवार को राहत पहुंचाई गई।

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