कोरोना वायरस के साथ ही बरसात में होने वाली बीमारी से भी बचना जरूरी

बरसात को बीमारियों का मौसम भी कहा जाता है।

दिल्ली : बरसात का मौसम बीमारियों को आमंत्रित करता है। पिछली साल की तरह इस बार भी बारिश का मौसम ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बरसात से होने वाली बीमारियों के अलावा कोरोना से भी सुरक्षित रहना है। मौसम में नमी के कारण जीवाणु और कीटाणु के पनपने के लिए अनुकूल स्थिति बन जाती है, जो पानी और खाद्य पदार्थों को दूषित कर शरीर की बीमारियों का कारण भी बन जाते हैं। बरसात को बीमारियों का मौसम भी कहा जाता है।

बरसात में होने वाली बीमारी

इस मौसम मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी एन्सेफलाइटिस, वायरल बुखार, जुकाम, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए-ई, डायरिया, गैस्ट्रोएन्टराइटिस, लेप्टोस्पायरोसिस और त्वचा संबंधित बामारियों और संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। इतना ही नहीं बरसात के मौसम में बुखार और जुकाम होना सामान्य बात है, ऐसे में किसी कोविड है या नहीं इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

अलग-अलग उम्र के बच्चों में अलग बीमारी

बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा बच्चों को ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। कलावती सरन अस्पताल के डायरेक्टर डॉ वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि अलग-अलग उम्र में बच्चों को अलग बीमारी होती है। नवजात शिशु या एक साल तक के बच्चों को संक्रमण का बहुत खतरा रहता है। उन्हें रैशेज होने लगते हैं या अन्य स्किन से जुड़ी समस्या होती है या निमोनिया, डायरिया आदि। इसलिए इस मौसम में घर में साफ-सफाई रखना जरूरी है ताकि वो घर में चल रहे हैं या मुंह में हाथ डाल लेते हैं, तो किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा कम रहे। इसके अलावा थोड़े बड़े बच्चों में कई मौसमी संक्रमण, एलर्जी आदि होने लगते हैं। 10-12 साल के ऊपर के बच्चों में हाइजीन पर थोड़ा कम ध्यान जाता है, तो वो मौसमी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। वायरल बुखार, जुकाम, टाइफाइड जैसी बीमारी भी होने लगती है।

मां का दूध बच्चे में बढाएगा इम्यूनिटी

अगर शिशु या छोटे बच्चों में जब डायरिया, पेचिश हो जाता है, वो खुद नहीं बता सकते इसलिए मां को ध्यान देना जरूरी है। इसलिए बच्चा पतला मल त्याग करता है, तो उसमें पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और उसके शरीर से पानी की कमी होने लगती है। इसलिए बच्चे को मां का दूध ज्यादा पिलाएं क्योंकि 6 महीने तक के बच्चों को मां का ही दूध पिलाना चाहिए। एक और ध्यान देने वाली बात है कि 6 महीने तक बच्चे को मां का दूध ही पिलाएं। ये न सिर्फ बच्चों को बीमारियों से बचाता है बल्कि शरीर में इम्यूनिटी भी बढ़ाता है। इसका फायदा बच्चे को सिर्फ बचपन में ही नहीं बल्कि आजीवन मिलता है। वह जल्दी बरसात की संक्रामक बीमारी का शिकार नहीं होता, अगर कभी किसी बीमारी से संक्रमित भी होगा, तो मजबूत इम्यूनिटी की वजह से जल्दी ठीक हो जाएगा।

इसके अलावा जो बच्चे 6 महीने से ज्यादा उम्र के हैं उन्हें दूध और पानी के अलावा ओआरएस का घोल भी पिला सकते हैं। बच्चे को जिंक की दवा हर बच्चे को 14 दिन के लिए देनी चाहिए। बच्चे में पानी की कमी नहीं होने दें, लेकिन अगर आराम नहीं मिलता, तो फोन पर या टेलीमेडिसिन के जरिए डॉक्टर से संपर्क करें या बिना देर किए अस्पताल में डॉक्टर से दिखाए।

कैसे पहचाने लक्षण

डायरिया, पेचिश आदि के लक्षण दिखने लगते हैं, लेकिन लक्षण पहचाने के और भी तरीके हैं जैसे, बच्चे का शरीर या चेहरा अंदर की तरफ धंसी लगे, बच्चे के शरीर में पींच करके या दबा करके देखें, तो वहां हल्के गड्ढे को अंदर जाने में समय लगे या अगर बच्चे को तेज बुखार आ रहा है, सुस्त पड़ गया, कोई फिट्स आए, मल में खून आदि आए, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

बारिश के मौसम में पाचन तंत्र हो सकता है प्रभावित

वहीं इस मौसम में पाचन तंत्र को लेकर विशेष ध्यान देना होता है, क्योंकि इस मौसम में जहां पानी और खाद्य पदार्थ के दूषित होने का खतरा होता है ,जो पाचन तंत्र पर भी असर करता है। एम्स के डॉ गोविंद मखरिया बताते हैं कि इस समय कई बार मौसम बदलता है और पानी कम पीने से शरीर में पानी की कमी भी हो जाती है। कई बार बारिश आदि की वजह से पानी में से मिट्टी आदि या दूषित पानी आने लगते है। इसलिए उबाल कर पानी अच्छा होता है।
डॉ मखरिया बताते हैं कि दूषित पानी से दस्त की बीमारी होती है बारिश में दस्त की बीमारी सामान्य होती है। दूषित पानी की वजह से ही एक बीमारी वाइल्ड हेपेटाइटिस होती है, जो लिवर को प्रभावित करती और लिवर में सूजन आ जाता है या पीलिया भी हो जाता है। बरसात के मौसम में जहां पानी रुक गया वहां मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया होने लगती है।

वयस्क कैसे रखें खयाल

वहीं वस्यक में डायरिया या कोई पेट से संबंधित बीमारी होने पर उन्होंने बताया कि सबसे पहले शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना है। डिहाइड्रेशन न हो इसके लिए ओआरएस का घोल पीते रहे हैं।अगर आराम नहीं मिलता ,तो देर नहीं करें और अस्पताल जाएं, लेकिन इन दिनों लोगों को डर है कि अगर अस्पताल गए और वहां से कोविड का संक्रमण हो गया तो, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि कोविड मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाया गया है। वहां से सामान्य इलाज करने वालों को जाने आने की जरूरत ही नहीं है, लेकिन घर में बीमारी बढ़ेगी उससे अच्छा है अस्पताल में जा कर इलाज कराएं।

कोविड 19 के लक्षण और सामान्य लक्षण कैसे पहचाने

बरसात के मौसम में दूषित जल, मच्छर के काटने और कुछ संक्रामक बीमारी होती हैं, जिनके लक्षण कोविड 19 के लक्षण के जैसे ही होते हैं। ऐसे में कोविड के और सामान्य बीमारी में अंतर पर कैसे पता कर सकते हैं इस बारे में बताते हुए सफदरजंग अस्पताल के डॉ बीके त्रिपाठी कहते हैं कि इसे सामान्य किसी को पहचानना मुश्किल है इसलिए इस मौसम में अपना विशेष ध्यान रखना है। फिर भी अगर गला खराब होने के साथ खांसी और बुखार आए या सांस लेने में परेशानी शुरू हो, शरीर में दर्द हो तो दो- तीन दिन में और बढ़ता जाए, तो तुरंत अस्पताल में जांच कराएं। इसके साथ ही उन्होंने कहा अगर किसी को ऐसे लक्षण हैं, तो पल्स ऑक्सीमीटर नाम की छोटी सी मशीन है, जो 700 से 800 में आ जाती है, घर पर रख लें इस मशीन में एक स्लॉट में उंगली डालने पर शरीर का ऑक्सीजन लेवल बता देगा। इससे पता चल जाएगा कि अगर संक्रमण है और शरीर में ऑक्सीजन कम हो रहा है,– तो यानि तुरंत अस्पताल जाने की जरूरत है।

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