साथ आई फ्लिपकार्ट और अमेजन कंपनियां, सरकार के खिलाफ मिलकर लड़ेंगीं

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों कंपनियां मिलकर सरकार पर इस नीति को बदलने का दबाव बनाना चाहती हैं।

केंद्र सरकार द्वारा ई-कॉमर्स नीति में बदलाव किए जाने के बाद दो बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां फ्लिपकार्ट और अमेजन एक साथ आ गई हैं।

सरकार की नीति के खिलाफ दोनों कंपनियों ने मिलकर नई योजना बनाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों कंपनियां मिलकर सरकार पर इस नीति को बदलने का दबाव बनाना चाहती हैं।

बता दें कि, अपनी नई योजनाओं को लेकर ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ड ने एक समाचार एजेंसी को एक ई-मेल किया है।

ई-मेल के अनुसार, सरकार के अपनी नीति में किए गए बदलाव की घोषणा का ई-कॉमर्स क्षेत्र और इसके समूचे पारिस्थितिकी तंत्र पर बुरा असर पड़ेगा।

यह एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जो सरकार की नई नीति की वजह से नुकसान में जा सकता है।

फ्लिपकार्ट ने कहा कि, यह जरूरी है कि उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए एक परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से एक व्यापक बाजार संचालित ढांचा बनाया जाए।

एक दशक में ई-कॉमर्स उद्योग ने ग्राहकों के विक्रेता और स्थानीय विनिर्माताओं के साथ जुड़ने के तरीकों में क्रांति ला दी है। इससे देश को भी लाभ हो रहा है।

ये कंपनियां मिलकर करेंगी सरकार से बातचीत

रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्लिपकार्ट और अमेजन इस काम में कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII), फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और अन्‍य कंपनियों की मदद लेंगी।

अन्‍य कंपनियों में सॉफ्ट बैंक, टाइगर ग्‍लोबल और नेस्‍पर्स शामिल हैं। ये सभी संगठन मिलकर सरकार से नीति बदलने के लिए बातचीत करेंगे।

रोजगार पर पड़ेगा असर

सरकार की नीतियों के खिलाफ दोनों कंपनियां अपने-अपने तर्क दे रही हैं। कंपनियों का कहना है कि, अगर उन्हें अपने व्यापार की मात्रा को बंद करना या कम करना पड़ता है, तो यह उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों की संख्या को प्रभावित करेगा।

आपको बता दें, कि ई-कॉमर्स कंपनियां फ्लिपकार्ट एवं अमेजन ने भारत में लाखों लोगों को रोजगार दिया है। ऐसे में यदि इन्हें व्यापार कम करना पड़ा तो कई लोगों की नौकरियां खतरे में आ जाएगी।

देना होगा समान हक

सॉफ्टबैंक ग्रुप ने तब नीति आयोग, कॉमर्स मिनिस्ट्री और फाइनेंस मिनिस्ट्री के अधिकारियों को पत्र लिखकर ई-कॉमर्स पॉलिसी को फाइनल करने से पहले निवेशकों और अन्य हितधारकों के हितों को ध्यान में रखने को कहा है।

इसके साथ ही कई व्यापार संगठन जैसे कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और स्वदेशी जागरण मंच सरकार पर लगातार दबाव डालते रहे हैं कि वे ऐसी ई-कॉमर्स पॉलिसी लाएं जो व्यापारियों के हितों को भी ध्यान में रखे।

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