समाजवादी पार्टी में वापस आए अमरेंद्र और पूर्व विधायक राजमती निषाद

राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेसवार्ता करके पार्टी में उनको शामिल किया

गोरखपुर: लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद से ही गोरखपुर समेत आसपास की सीटों पर निषाद समाज का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए टिकट की दावेदारी तेज हो गई. सपा-बसपा गठबंधन में निषाद पार्टी के शामिल होते ही पूर्व मंत्री जमुना निषाद के बेटे अमरेंद्र निषाद और उनकी माता पूर्व विधायक राजमती निषाद सात मार्च को सपा का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई थी.

भाजपा ने उन्हें निषाद समाज को प्रतिनिधित्व देने का भरोसा दिलाया था। कुछ दिन बाद ही सपा सांसद प्रवीण निषाद और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद भी गठबंधन से अलग होकर भाजपा में शामिल हो गए।

इसके बाद गठबंधन ने सपा के टिकट पर गोरखपुर से रामभुआल निषाद को प्रत्याशी बनाकर निषाद समाज को प्रतिनिधित्व दे दिया तो भाजपा ने प्रवीण निषाद को संतकबीरनगर से प्रत्याशी बना दिया। भाजपा की रणनीति से आहत अमरेंद्र निषाद ने दोबारा सपा में शामिल होने का निर्णय लिया।

जिसके बाद भाजपा में सात मार्च को शामिल हुए अमरेंद्र और राजमती निषाद 43 दिन बाद ही समादवादी पार्टी में वापस हो गए। लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेसवार्ता करके पार्टी में उनको शामिल किया। पार्टी में वापस आने के बाद अमरेंद्र ने कहा कि उनका विरोध समाजवादी पार्टी से नहीं बल्कि निषाद समाज को गुमराह करने वाले डा. संजय और प्रवीण निषाद से था।

वह पार्टी से चले गए तो मुझे वापस घर आना ही था। अखिलेश यादव हमारे नेता हैं, उन्होंने हमेशा निषाद समाज के लिए अच्छा किया है, आगे भी वह बेहतर करेंगे। उधर, अमरेंद्र की पार्टी में वापसी के बाद अब एक नया निषाद समीकरण तैयार होने लगा है।

Back to top button