CBSE टॉपर : अम्बिका खन्ना और तनु का लक्ष्य है IAS बनना

- शैलेंद्र गुप्ता शैली

फ़िरोज़ाबाद : सीबीएसई के हाई स्कूल के रिजल्ट में फ़िरोज़ाबाद के छह स्टूडेंट्स ने जिले में टॉप किया है। टॉप करने वाले स्टूडेंट्स में तीन छात्र और दो छात्राएं हैं। रिजल्ट आते ही छात्रों के चेहरे पर मुस्कान तैर गई।97 से 98 प्रतिशत से ज्यादा अंक पाने वालों की तो कदम जमीन पर नहीं पड़े।

98.6 प्रतिशत अंक पाकर एशियन पब्लिक स्कूल के उमेश सिंह वर्मा एवं यंग स्कॉलर्स एकेडमी की तनु कुमारी ने संयुक्त रुप से जिला टॉप किया है ।98.4 % अंक के साथ सेंट जोन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा
अंबिका खन्ना दूसरे स्थान पर रहीं। ज्ञानदीप सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र तुषार अग्रवाल 98% अंक पाकर तीसरे स्थान पर रहे।97.6 % अंक लाकर किड्स कॉर्नर हैप्पी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा सोम्या गुप्ता चौथे स्थान पर रहीं।97.2% अंक पाकर माता प्रसाद कलावती स्कूल के छात्र ध्रुव सारस्वत पांचवे स्थान पर रहे।

छोटी उम्र बड़े सपने : सेंट जॉन्स स्कूल की छात्रा अंबिका खन्ना ने 98.4 % अंक पाकर जिले में दूसरा स्थान हासिल करने वाली अंबिका खन्ना का सपना है कि वह आईएएस बन कर गरीबों की सेवा करना चाहती है। मीडिया वेबसाइट क्लिपर डॉट कॉम से बातचीत करते हुए अंबिका खन्ना ने कहा कि आईएएस बनने की प्रेरणा उसे फिरोजाबाद में तैनात रहीं जिलाधिकारी संध्या तिवारी से मिली।अंबिका कहती है कि वह फ़िरोज़ाबाद के कलेक्ट्रेट में कार्यरत पिता चीफ रेवेन्यू लेखाकार राजेन्द्र खन्ना के साथ जिलाधिकारी संध्या तिवारी से मिली थीं।होनहार छात्रा अंबिका खन्ना फिरोजाबाद में ही तैनात रहे जिलाधिकारी विजय किरण आनंद को अपना आदर्श मानती है।

वह अक्सर अपने पिता राजेन्द्र खन्ना और अखवारों के जरिये डीएम विजय किरण आंनद की कार्यप्रणाली को सुनती पढ़ती थी ।अगर उन्हें आईएएस बनने का मौका मिला तो विजय किरण की तरह जनता की सेवा करेंगी।अंबिका के बड़े भाई भरत खन्ना एनआईटी श्रीनगर में बीटेक की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।मां मंजू खन्ना ग्रहणी हैं। अंबिका मानती है कि अगर कड़ी मेहनत से सकारात्मक प्रयास किए जाएं तो सोचा गया सपना एक दिन हकीकत में जरूर बदलेगा।प्रथम आये सयुंक्त टॉपर उमेश वर्मा इंजीनियर बनना चाहते हैं और तनु आईएएस बनना चाहती है।तुषार इंजीनियर बनना चाहते हैं।

सीबीएसई के नए नियमों के तहत सत्र 2017- 2018 की दसवीं बोर्ड परीक्षा को पास करना छात्रों के लिए आसान रहा। परीक्षार्थियों को इंटरनल और बोर्ड परीक्षाओं को मिलाकर पास होने के लिए 33% अंक लाने थे। इससे पहले छात्र को इंटरनल में भी 33% और बोर्ड परीक्षा में भी 33% अंक अलग-अलग लाना अनिवार्य होता था। इस नियम के तहत छात्र को 20 अंको की इंटरनल परीक्षा और 80 नंबर की बोर्ड परीक्षा में मिलाकर 33% अंक लाना अनिवार्य था। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बोर्ड परीक्षाओं को नकलविहीन बनाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे।

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