सभी शहरों में लागू होगा अंबिकापुर मॉडल : अमर

रायपुर : छत्तीसगढ़ के सभी शहरों में अंबिकापुर का कचरा संधारण का मॉडल लागू किया जाएगा। यह मॉडल 168 नगरीय निकायों को स्वच्छता की कसौटी पर कसने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए अगले साल जनवरी-फरवरी से शुरु हो रहे राष्ट्र व्यापी स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 के अंतर्गत नगरीय निकायों की साफ-सफाई व्यवस्था का मूल्यांकन किया जाएगा। नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल ने कार्यशाला का शुभारंभ किया।

नगरीय प्रशासन विभाग ने स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 के लिए प्रचार-प्रसार गतिविधियों पर आधारित बुकलेट एवं बस्तर संभाग में स्वच्छता के प्रचार-प्रसार के लिए हल्बी भाषा में तैयार बस्तरिया गीत की वीडियो का विमोचन भी किया।

नगरीय प्रशासन मंत्री ने कहा कि, प्रदेश के 168 नगरीय निकायों में से 106 खुले में शौचमुक्त घोषित हो चुके हैं। इसके लिए निकायों के पदाधिकारी और अधिकारी-कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। इनके अथक मेहनत से ही यह उपलब्धि मिली है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2019 तक पूरे देश को खुले में शौचमुक्त बनाने का संकल्प लिया है, लेकिन प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ को 2 अक्टूबर 2018 तक अर्थात केन्द्र सरकार की ओर से निर्धारित समय से एक वर्ष पहले ही राज्य को खुले में शौचमुक्त करने का संकल्प लिया है।
उन्होंने कहा कि, इससे बढ़कर हमारा लक्ष्य 2 अक्टूबर 2017 तक प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को खुले में शौचमुक्त करने का है। नगरीय प्रशासन मंत्री ने कहा कि, किसी लक्ष्य या संकल्प पूरा करने के लिए एक सुव्यवस्थित कार्य-योजना बनाकर काम करने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने नगरीय निकायों को साफ-सुथरा बनाने के लिए धन-राशि की कोई कमीं नहीं होने दी है।

राज्य सरकार ने नगरीय निकायों के लिए बेहतर वित्तीय प्रबंधन किया है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में शौचालय बनाने के लिए हितग्राहियों से सबसे कम धनराशि छत्तीसगढ़ में ली जाती है। अग्रवाल ने कहा कि, भविष्य में भी नगरीय निकायों को स्वच्छता मिशन के लिए पर्याप्त धनराशि दी जाएगी।

अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में ठोस अपशिष्टों को इकठ्ठा करने के लिए अंबिकापुर नगरीय निकाय की मॉडल की सराहना की। उन्होंने कहा कि, डोर-टू-डोर कचरा इकठ्ठा करने का अंबिकापुर मॉडल देशभर में लोकप्रिय हुआ है। इस मॉडल को छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय निकायों में लागू करने की जरूरत है। इससे लगभग सात हजार महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

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