अमेरिकी ने एच1-बी वीजा को लेकर रुल किया सख्त, आईटी सेक्टर के लिए बनी मुसीबत

नए नियमों के तहत एच1-बी वीजा के लिए इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन कराना होगा

बेंगलुरु। एच1-बी वीजा के लिए अमेरिकी सरकार के हालिया प्रस्तावों ने देश की आईटी सर्विस सेक्टर के लिए परेशानी खड़ी कर दी है।

नए नियमों के तहत एच1-बी वीजा के लिए इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन कराना होगा। साथ ही 65,000 वीजा की अधिकतम सीमा के अंदर अमेरिका में ही मास्टर या एडवांस डिग्री लेने वालों को वीजा देने के लिए रिवर्स सेलेक्शन प्रोसेस को शामिल किया गया है।

अमेरिकी सरकार के इस कदम से भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के लिए यूएस वीजा (एच1-बी) मिलने की संभावना कम हो सकती है। इस नियम का प्रस्ताव अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएसएस) ने रखा है,

जिसके तहत एच1-बी वीजा मांगने वाले को सबसे पहले यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) के पास इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। एच1-बी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय आईटी कंपनियां इस्तेमाल करती हैं।

नैस्कॉम ने कहा कि देश का आईटी सर्विस सेक्टर इसे एक नई समस्या के रूप में देख रहा है। हालांकि इंडस्ट्री बॉडी ने यह भी कहा कि वह नियमों की समीक्षा के बाद ही इस बारे में कोई और टिप्पणी करेगी।

नैस्कॉम ने कहा, ‘अभी और अप्रैल 2019 में खुलने वाले एच-1 बी वीजा के अगले सीजन के बीच ज्यादा समय नहीं बचा है। कंपनियां पहले ही अपनी जरूरतों का आकलन शुरू कर चुकी हैं और अगले साल के लिए आवेदन जमा करने की तैयारी कर रही हैं।

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