छत्तीसगढ़राज्य

अमित जोगी का अजजा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर हमला, बोले – पोलावरम बांध में ठेकेदारो के साथ नंदकुमार की सांठ-गांठ

साय से पूछे पांच सवाल...

रायपुर: मरवाही विधायक अमित जोगी ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंदकुमार साय पर पोलावरम बांध मामले को लेकर हमला बोला। अमित जोगी ने आरोप लगाया कि पोलावरम बांध के 70000 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट में नंद कुमार साय की भी सांठगांठ है। उन्होंने मामले में आयोग अध्यक्ष के आंध्रप्रदेश दौरे की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि शायद यही वजह है जिसके कारण राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने आंध्र प्रदेश सरकार को क्लीन चिट दे दी है।

उन्होंने कहा कि आयोग के अध्यक्ष आज से 70 दिन पहले पोलावरम बांध के प्रभावितों के हित में बात कह रहे थे, लेकिन आज पोलावरम बांध मामले में आंध्र प्रदेश को क्लीन चिट देकर उन्होंने प्रभावितों का माखौल उड़ाया है। उन्होंने कहा कि नंद कुमार साय ने पोलावरम के सुकमा और कोंटा प्रभावितों का मजाक उड़ाया है ।पूरे मामले में अमित जोगी ने 5 सवाल भी उठाए हैं।साथ ही 5 सवालों के जवाब मांगे हैं।इसके साथ ही राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष की बर्खास्तगी की मांग भी की है।

इन 5 सवालों पर मांगे जवाब

30 मार्च 2018 को आंध्र प्रदेश में ऐसा क्या हुआ जिसके बाद पोलावरम को लेकर आपके सुर ही बदल गए ? ढाई महीने पहले विस्थापन पर संशय व्यक्त किया था और ढाई महीने बाद अचानक संतुष्टि ? क्या ढाई महीने में ही प्रभावितों को न्याय मिल गया और उनकी समस्यायों का निदान हो गया ? आप सुकमा और कोंटा जाकर अब तक छत्तीसगढ़ के प्रभावितों से क्यों नहीं मिले ? बिना सुकमा और कोंटा गए,बिना प्रभावित आदिवासियों से मिले,आपने आंध्रा जाकर आखिर किस आधार पर यह वक्तव्य दिया और दावा किया कि विस्थापन और बाँध का कार्य संतोषजनक है ?

 

संविधान के अनुच्छेद 338क के खण्ड (5) के उपखण्ड (क) में निर्दिष्ट किसी विषय का अन्वेषण या उपखण्ड (ख) में निर्दिष्ट किसी शिकायत की जाचं करते समय राष्ट्रीय जनजाति आयोग को एक सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त हैं। आपने बगैर सुकमा और कोंटा गए,बिना प्रभावितों से वार्तालाप किये, बिना किसी साक्ष्य के या दस्तावेजों के, किस आधार पर पोलावरम के पक्ष में यह सार्वजनिक वक्तव्य दिया कि आंध्रा के अधिकारी अच्छे से प्रभावितों का ध्यान रख रहे हैं ? जबकि ये जानते हुए भी कि आप एक संवैधानिक पद पर विराजमान हैं और विशेष तौर पर उच्चतम न्यायालय में चल रहे पोलावरम मामले में संवेदनशीलता को देखते हुए आपके वक्तव्य या दावे का न्यायिक महत्व है।  

   

आपने आंध्रा प्रदेश में कहा कि पोलावरम बाँध से सभी राज्य लाभान्वित होंगे ? छत्तीसगढ़ कैसे लाभान्वित होगा, ये बताईये ? क्या आंध्रा प्रदेश, बाँध की ऊंचाई कम करने राजी हो गया है ? मुआवज़े की रकम किस आधार पर तय हुई है ? क्या छत्तीसगढ़ में जन सुनवाई पूरी और विधिवत हो चुकी है ? प्रभावितों का विस्थापन कहाँ किया जा रहा है ? कितनी सिंचित भूमि आदिवासियों को मिलेगी ?आपको यह सब ज्ञात होगा, तभी आपने दावा किया है कि पोलावरम सर्वश्रेष्ठ है और आदिवासियों के जीवन में नए रंग लेकर आएगा और वो प्रसन्न हैं पोलावरम से।
तो कृपया कर, क्या आप छत्तीसगढ़ के लोगों विशेषकर छत्तीसगढ़ सरकार को अपने इन दावों की विस्तृत जानकारी देंगे? क्योंकि आपके दावों और अवलोकन के विपरीत छत्तीसगढ़ सरकार तो पोलावरम का विरोध कर रही है। संवैधानिक पद पर रहकर, बिना किसी ठोस जानकारी और प्रमाण के पक्ष रखना कानूनी जुर्म और अपराध है। मैं नंदकुमार जी को चुनौती देता हूँ कि अगर वो सच्चे हैं तो छत्तीसगढ़ की जनता के समक्ष यह शपथ-पत्र लिख कर दें कि सुकमा कोंटा के प्रभावित आदिवासियों के साथ न्याय हुआ है, जनसुनवाई हुई है और पोलावरम से छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ वासियों को कोई नुक्सान नहीं होगा। 

 

वो ऐसा करेंगे नहीं क्योंकि आंध्रा जाकर वो प्रभावित बस्तरवासियों के भविष्य का सौदा जो कर आये हैं। नंदकुमार साय जी ने केवल आदिवासियों के नाम पर ढोंग और स्वार्थ की राजनीति की है। आंध्रा प्रदेश की सरकार ने पोलावरम के कॉन्ट्रैक्टरों के माध्यम से राष्ट्रीय जनजाति आयोग के पक्ष को खरीद लिया है। आज उसी का परिणाम है कि राष्ट्रीय जनजाति आयोग का अध्यक्ष छत्तीसगढ़ से होने के बाद भी,छत्तीसगढ़ के हितों की अनदेखी हो रही है और आंध्र प्रदेश का हित साधा जा रहा है,पोलावरम को देश का नहीं बल्कि विश्व का सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट बताया जा रहा है।

हम राज्य सरकार और केंद्र सरकार से यह मांग करते हैं कि वो नंदकुमार साय जी के आंध्रा दौरे की जांच करे, उनसे मिलने वाले लोगों की पहचान सार्वजनिक की जाए । साथ ही हम मुख्यमंत्री से यह मांग करते हैं कि वो राष्ट्रीय जनजाति आयोग के अध्यक्ष के पोलावरम समर्थित दावों और ब्यान पर आधिकारिक तौर पर अपना कड़ा विरोध दर्ज करे और इस संबंध में केंद्र सरकार और महामहिम राष्ट्रपति को अवगत कराये ।

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अमित जोगी का अजजा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर हमला, बोले - पोलावरम बांध में ठेकेदारो के साथ नंदकुमार की सांठ-गांठ
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With assembly election ahead With assembly election ahead, well known Digital Media platform clipper28.com has decided to gauge the mood of Chhattisgarh through its own opinion poll. As an aware voter and stakeholder of the democratic process, kindly do answer the following questions so that prevailing mood of state can be ascertained.
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Phone Number
Which party will emerge as the single largest party?
Which party will have more seats?
Whom would you like to see as next Chhattisgarh Chief Minister?
Have you witnessed development work in your area?
Do you think that farmers of Chhattisgarh are satisfied with BJP government?
Do you think youngsters are happy with employment scenario created by Chhattisgarh/state government?
Do you think state government has done enough on issue of women empowerment?
Are you satisfied with work done by your legislator? Have electoral promises been fulfilled or not?
Are you satisfied with the amenities provided by the government in your area?
Do you think the state government has successfully tackled naxal menace?
Are you satisfied with work done by different state Ministers?

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ओपिनियन पोल
छत्तीसगढ़ की आगामी विधानसभा चुनाव के लिए डिजिटल मीडिया ‘clipper28.com’ नेसटीक ओपिनियन पोल करनेका निश्चय किया है. अतः आप नीचे दिए सवालों के निष्पक्ष जवाब देंताकि राज्य की आने वाले दिनों की सही सियासी तस्वीर सामनेआ सके. कृपया अपना मत जरूर दें- With assembly election ahead
नाम
विधानसभा क्षेत्र
आयु
फ़ोन नं
विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी कौन सी होगी ?
किस पार्टी को ज्यादा सीटें मिलेगी?
अगले मुख्यमंत्री के रूप में किसे देखना चाहेंगे?
क्या आपके क्षेत्र में विकास दिखाई पड़ रहा है?
क्या छत्तीसगढ़ का किसान भाजपा शासन से संतुष्ट है?
जो रोजगार छत्तीसगढ़ सरकार ने दिया, क्या उससे युवा वर्ग संतुष्ट है?
राज्य सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जो किया, उससे महिलाएं संतुष्ट हैं?
क्या आप अपने विधायक से संतुष्ट हैं? उन्होंने अपने वादे पूरे किए या अधूरे हैं उनके काम?
क्या आप अपने क्षेत्र की सरकारी सुविधाओं सेसंतुष्ट हैं?
क्या नक्सली समस्या पर नियंत्रण हुआ है?
क्या प्रदेश के मंत्रियों के कामकाज से संतुष्ट हैं?
-देश हित के लिए मतदान अवश्य करें-
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