छत्तीसगढ़

सिंघम बनकर रेंजर पर गरजने वाले वनरक्षक की खुली पोल, पूर्व में भी कार्यशैली को लेकर हो चुका है निलंबित

ग्रामीणों के अनुसार वनरक्षक ने भी कटवाए थे 250 बांस

अरविन्द शर्मा:
कटघोरा: कुछ दिनों से कटघोरा वन मण्डल के बांकीमोंगरा बीट में पदस्थ वनरक्षक व रेंजर विवाद वाली वीडियो जमकर वायरल हो रही है। वायरल वीडियो में दिखाई पड़ रहा है कि वनरक्षक ने रेंजर की जमकर क्लास ली है और रेंजर साहब बिना कुछ कहे बचते नजर आ रहे हैं।

रेंजर

इस वीडियो में वनरक्षक ने खूब वाहवाही लूटी है और इनको सिंघम बनाने में भी कोई कमी नही की गई है। सभी इनकी तारीफ कर रहे हैं कि वन का रखवाला बहुत ईमानदार है जिसमे वनरक्षक ने सीनियर अधिकारी से बिना डरे उन्हें कानून का पाठ दिया है जिससे यह तो सिद्ध हो गया है कि वनरक्षक एक ईमानदार वनकर्मी है जिसने बहुत ही सराहनीय कार्य किया है…. वनरक्षक का यह कार्य बेहद प्रशंसनीय व तारीफेकाबिल है जो वन मंडल के भ्रस्टाचार व अनैतिक कार्यो की पोल खोलता है।

ये था पूरा मामला

दरअसल बीते कुछ दिनों पूर्व कटघोरा वन मण्डल के वन परिछेत्र कटघोरा के बांकीमोंगरा हल्दीबाड़ी स्थित बाड़ी में 353 बांसों की अवैध कटाई को लेकर यहाँ पदस्थ वनरक्षक शेखर सिह रात्रे व कटघोरा रेंजर मृत्युंजय शर्मा के बीच जोरदार विवाद हुआ था।जिसमे रेंजर साहब वनरक्षक की बाते सुनकर हतप्रभ अवस्था मे नजर आते हैं।

इस विवाद में वन रक्षक शेख रात्रे अपने वनपरिक्षेत्राधिकारी को जमकर खरीखोटी सुना रहा है।इतना ही नही इस विवाद को लेकर रात्रे ने मृत्युंजय शर्मा,डिप्टी रेंजर अजय कौशिक व अन्य वनकर्मी सहित 11 मजदूरों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 के अंतर्गत धारा 26 (1) ‘क’ के तहत मामला भी कायम कर लिया था।

एकाएक जब वन रक्षक इतनी बहादुरी से अपना कर्तब्य निभाया और रेंजर को सबक सिखाया तो सभी ने वनरक्षक की तारीफ भी की।इस अवैध बांस कटाई के मामले पर जब प्रकाश डाला गया तो कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने इस मामले की दिशा ही बदल डाली।

जब इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों से वनरक्षक के कार्यो की चर्चा की गई तो वहाँ.. ग्रामीणों ने जो बखान किया उसे सुनकर तो …पूरा माजरा ही बदल गया एकाएक हीरो बना वनरक्षक अब कुछ और ही नजर आने लगा था..दरअसल जब गांव के एक बुजुर्ग 65 वर्षीय व्यक्ति से इनके कार्यो की चर्चा की गई तो इन्होंने जो बताया उसे सुनकर तो पूरी कहानी ही बदल गई थी जिसे सुनकर समझ आ गया कि यह वाक्या तो पुरानी कहावत “उल्टा चोर कोतवाल को डाटे” वाली जैसे प्रतीत होने लगी।

इन्होंने बताया कि..यहाँ पदस्थ वनरक्षक रात्रे ने लगभग 15 दिनों पूर्व बांकीमोंगरा बीट में 250 बांस मेरे से ही कटवाए थे और मुझे कहा गया था कि..इसके एवज में मेहनताना स्वरूप 1000 रु दिया जाएगा तो मैंने बाँसों की कटाई कर सभी बांसों को एकत्र करके उसी स्थान पर रख दिया था और मैंने अपना मेहनताना ले लिया था, उसके बाद उन बांसों को कहा ले जाया गया इसकी जानकारी मुझे नही है।

जब ऐसी बाते सामने आने लगी तो माजरा कुछ और ही प्रतीत होने लगा, तब इस मामले में और लोगो से भी चर्चा की गई।यहाँ के वन समिति अध्यक्ष इतवार से भी चर्चा हुई… इन्होंने भी जो बताया वो हैरत में डाल देने वाला था इन्होंने बखान किया कि मैंने भी कटाई किये हुए बांसों को देखा था वन समिति का अध्यक्ष होने के नाते जब मेरे द्वारा इस विषय मे पूछा गया तो मुझे बताया कि विभागीय कार्यों के लिए बांसों की कटाई की जा रही है।

वन समिति का अध्यक्ष होने के नाते यह जानकारी मुझे नही दी गई थी तो मैंने डिप्टी रेंजर को अवगत कराना उचित समझा।जिस पर डिप्टी रेंजर ने जांच करने की बात कही थी।इतवार ने ये भी बताया कि मेरी जानकारी के बिना वनरक्षक शेखर रात्रे ने मनमाने ढंग से बाँसों की कटाई करवाई थी जो कि बिल्कुल उचित नही है।

जब वनपरिक्षेत्राधिकारी को इन बातों की जानकारी हुई तो वे डिप्टी रेंजर सहित मौका जांच के लिए रवाना गए हुए थे तथा मौके का निरीक्षण कर ही रहे थे कि इसी बीच वनरक्षक को भी भनक लग गई और वह भी मौके पर पहुँच गया।

वनरक्षक ने मोके की स्थिति को भांप लिया और वनरक्षक ने विभागीय कार्य के लिए गिरे पड़े सूखे बाँसों को एकत्र किए जा रहे वाली बात को मुद्दा बना दिया।षड्यंत्र पूर्वक नजर आ रहा पूरा वाक्या किसी फ़िल्म की कहानी से कम नही था समय पर मीडिया का पहुच जाना और सीनियर अधिकारियों को सरेआम शर्मसार कर देना आखिर वजह क्या रही जो एकाएक यह मुद्दा तिल से ताड़ बन गया..कयास तो ये भी लगाए जा रहे हैं कि रेंजर व वनरक्षक के तालमेल अच्छे नही थे और यह सिर्फ एक मौका था जो घास से बांस बन गया।

दरअसल इसी बीच विभागीय कार्य (टिगार्ड) के लिए सूखे गिरे पड़े बाँसों को एकत्र करने के लिए कटघोरा रेंजर के द्वारा बांकीमोंगरा हल्दीबाड़ी में मजदूर लगाकर बाँसों को एकत्र किया जा रहा था जिसमे कुछ बांस टेड़े मेढ़े होने के साथ हरे भरे भी दिख रहे थे और उन बाँसों को देखकर वनरक्षक कटाई करने की बात कहते हुए रेंजर शर्मा को सरेआम जमकर खरीखोटी सुना डाली और खड़े खड़े कानून का पाठ भी पढ़ा दिया जिसे सुनकर रेंजर व डिप्टी रेंजर हतप्रभ रह गए और वनरक्षक की अभद्रता पर कुछ बोलना उचित नही समझे।इसी बीच मीडिया के बन्धु भी मौजूद थे और ये पूरा वाक्या कैमरे में कैद हो गया।

पूर्व में भी वनरक्षक रात्रे हो चुका है विभागीय कार्यवाही का शिकार

जानकारी ये भी मिली है कि वनरक्षक शेखर सिह रात्रे पूर्व में कोरबा वन मण्डल से भी अपने गैरजिम्मेदाराना कार्यो की वजह से निलंबित कर दिये गए थे।करीब 8 माह पूर्व ही कटघोरा वन मण्डल में बहाल होकर आए हैं।

कटघोरा वनमंडलाधिकारी ने भी बताया है कि वनरक्षक अपने कार्यों को लेकर काफी लापरवाह है और अपने सीनियर अधिकारी से जवाब तलब कर उलझ जाना इनके लिए कोई बड़ी बात नही है।यहाँ तक कि कटघोरा वनमंडलाधिकारी शमा फारूकी ने भी वनरक्षक के कार्यो को गैरजिम्मेदाराना बताया है।

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One Comment

  1. वाह क्या बात है, जब कोई अफसर पर आरोप आए , तो पकड़ने वालो को ही अपराधी बना दो, फिल्मो की पुरानी स्टोरी लग रहा , 🤣🤣
    जनता तो विडियो को ही सच मानेगा

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