आनंदीबेन पटेल ने संभाली मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद की बागडोर

राज्यपाल बनने से पहले पटेल गुजरात की मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं

आनंदीबेन पटेल ने संभाली मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद की बागडोर

गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में शपथ ले ली है। उन्हें उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता ने शपथ दिलाई। गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री पटेल के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित मंत्रिपरिषद के अनेक सदस्य मौजूद रहे।

इसी के साथ आनंदीबेन प्रदेश की 27वीं राज्यपाल बन चुकी हैं। महिलाओं में वह प्रदेश की दूसरी राज्यपाल हैं। उनसे पहले सरला ग्रेवाल प्रदेश की महिला राज्यपाल थीं।

राज्यपाल बनने से पहले पटेल गुजरात की मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं। 21 नवंबर 1941 को जन्मी पटेल मोहिनाबा हाई स्कूल अहमदाबाद की प्राचार्य के पद से रिटायर हुई थीं। शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, सहित विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। आनंदीबेन पटेल अहमदाबाद से परिवार के साथ एक खास बस में सवार होकर आईं। रास्ते में उन्होंने बाकायदा रोड शो भी किया।

भगवान महाकाल का दर्शन
सोमवार को जब आनंदीबेन गांधीनगर से भोपाल के लिए निकलीं तो ऐसा लगा कि वह बारात लेकर जा रही हैं। वह अपने बेटे संजय, बेटी अनार और अन्य परिजनों के एक चार्टर्ड बस में सवार हुईं। इस चार्टर्ड बस से उन्होंने उज्जैन तक का 415 किलोमीटर का सफर तय किया। उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन के बाद वह मध्य प्रदेश सरकार के वाहन से भोपाल पंहुची। गांधीनगर से उज्जैन तक के सफर के दौरान आनंदीबेन पटेल ने एक तरह रोड शो किया। रास्ते में जगह-जगह उनका स्वागत हुआ।

आनंदीबेन पटेल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करीबी मानी जाती हैं। काफी पहले ही उन्हें मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाये जाने का फैसला हो गया था लेकिन गुजरात के चुनाव की वजह से घोषणा नहीं हुई थी। वह प्रदेश की पहली ऐसी राज्यपाल हैं जो रोड शो करती हुई आईं।

ओमप्रकाश कोहली की जगह ली
यह संयोग है कि उन्होंने गुजरात के वर्तमान राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली की जगह ली है जो करीब साढ़े सोलह महीने से मध्य प्रदेश के कार्यकारी राज्यपाल के रूप में काम देख रहे थे। आनंदीबेन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल की पांचवीं राज्यपाल हैं। जब शिवराज मुख्यमंत्री बने थे तब बलराम जाखड़ प्रदेश के राज्यपाल थे, उनके बाद रामेश्वर ठाकुर और रामनरेश यादव आए।

ये सभी राज्यपाल कांग्रेस द्वारा नियुक्त किए गए थे। 7 सितम्बर 2016 को जब रामनरेश यादव का कार्यकाल खत्म हुआ तब दिल्ली की गद्दी पर नरेंद्र मोदी बैठ चुके थे। यह भी संयोग ही था कि मोदी ने अन्य राज्यपालों की तरह रामनरेश यादव को हटाया नहीं। व्यापमं घोटाले में नाम आने के बाद भी उन्हें अपना कार्यकाल पूरा करने दिया गया। रामनरेश यादव के जाने के बाद ओमप्रकाश कोहली को गुजरात के साथ-साथ मध्य प्रदेश का भी प्रभार दे दिया गया। मोदी सरकार को मध्यप्रदेश के लिए नया राज्यपाल तय करने में साढ़े सोलह महीने से ज्यादा का समय लग गया।

शिवराज के लिए कई मायनों में है खास
आनंदीबेन का मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के लिए कई मायनों में खास है। मध्यप्रदेश में 10 महीने बाद विधानसभा चुनाव होंगे।अगले 10 महीने शिवराज के लिए पिछले 12 साल से ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि अगले चुनाव में उन्हें जीत की हैट्रिक बनानी है और परिस्थितियां पहले जैसी नहीं हैं। यदि राज्यपाल ने तटस्थ भूमिका निभाई तो उन्हें मुश्किल होगी और अगर कहीं वह सक्रिय हो गईं तो शिवराज के लिए डगर कठिन हो जाएगी। बीजेपी के भीतर यह चर्चा है कि मोदी ने आनंदीबेन को मध्यप्रदेश के राजभवन में इसलिए बैठाया है ताकि वह शिवराज पर सीधी नजर रख सकें। पीएम मोदी मध्यप्रदेश के प्रभारी महासचिव रहे हैं।

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