छत्तीसगढ़

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं द्वारा हड़ताल पर जाने से प्रशासन सख्त

रायपुर : आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ द्वारा तीन सूत्रीय मांगों को लेकर 31 जुलाई से 2 अगस्त तक हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहें है। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं द्वारा यदि हड़ताल किया जाता है अथवा अपने कर्तव्य पर अनुपस्थित होते हैं तो शासन द्वारा हड़ताल दिवसों में मानदेय की राशि की अनुपालिक कटौती करते हुए हड़ताल की अवधि को नियमित सेवा अवधि में गणना नही करने के निर्देश जारी किए गए है। फलस्वरूप भविष्य में पर्यवेक्षक अथवा कार्यकर्ता के पद पर पदोन्नति के लिए संभवतः इनके नामों पर विचार किया जाना संभव नहीं होगा।
पाण्डेय ने बताया कि एकीकृत बाल विकास परियोजना केंद्र सरकार द्वारा सहायिका योजना है। योजनांतर्गत पदस्थ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को मानसेवी पद माना गया है तथा तदनुसार भारत शासन द्वारा मानदेय दिया जा रहा है। केंद्र शासन के द्वारा देय मानदेय के अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा अन्य राज्य की निधि से प्रत्येक कार्यकर्ता को 1000 रूपए तथा सहायिका को 500 रूपए प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं का पद मानसेवी होने से उन्हें शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाना संभव नहीं है। शासन द्वारा इन्हें अनेक सुविधाएं दी जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग निरंतर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के हित में प्रयासरत है। भारत सरकार के समक्ष राज्य द्वारा समय-समय पर इस हेतु प्रयास भी किए गए है एवं भविष्य में भी यथासंभव प्रयास किए जाते रहेंगे। कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के द्वारा समाज के अतिसंवेदनशील वर्ग अर्थात 06 वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती, धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य एवं कुपोषण की रोकथाम के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेवाएं दी जा रही है एवं हड़ताल पर चले जाने से केंद्रों का नियमित संचालन नहीं हो सकेगा तथा बच्चों के ’भोजन के अधिकार’ का उल्लंघन होगा।

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