इच्छा के पूर्ति न होने पर क्रोध की उत्पत्ति होती है : ब्रम्हाकुमारी आरती दीदी

दीपक वर्मा आरंग
आंरगः प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय आरंग में महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डोमेश्वरी वर्मा अध्यक्ष जिला पंचायत रायपुर, विशिष्ट अतिथि चंद्रशेखर चंद्राकर अध्यक्ष नगर पालिका परिषद आरंग, भगवताचार्य ब्रम्हाकुमारी आरती दीदी, ब्रम्हाकुमारी चंद्रकला दीदी एवं सेवाकेन्द्र संचालिका ब्रम्हाकुमारी लता दीदी द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

भगवताचार्य ब्रम्हाकुमारी आरती दीदी ने कहा कि परमपिता परमात्मा शिव का दिव्य अवतरण जो महाशिवरात्रि का यादगार है, धर्म की अतिग्लानि अर्थात धर्म की हानि व अधर्म की वृद्धि होती है तबही साकार रुप मे लोगो के सम्मुख प्रकट होता हूं। साधुपुरुषो का उद्धार, पाप कर्माे का विनाश व नए धर्म की स्थापना के लिए इस संगमयुग में प्रकट होता हूं।

किंतु देखा जाए तो दो तरह के भगवान हमने मान लिए है एक वो परम सत्य, परम सत्ता जिन्होने हमको व इस सृष्टि को बनाया एवं आध्यात्मिक ज्ञान से हमारे आंतरिक चेतना को जगाया, जिससे हमारा अंतर्मन एवं अंतर जगत सुख, शांति व खुशी से मर गया एवं प्रभु प्रेम की अनुभूति से हमारा संपूर्ण जीवन सफल हो गया।

दूसरा वो भगवान जिसको हमने मान लिया, पूजा पाठ, भक्ति सब कुछ किए पर अपने अनुकुल, धर्म को कर्म से अलग कर दिया और विषय विकारो के चिंतन से कामना की उत्पत्ति होती है इच्छा के पूर्ति न होने पर क्रोध की उत्पत्ति होती है इस कलियुगी रुपी घोर रात्रि में दुख, अशांति, दुराचार, को अंत करने परमात्मा शिव का इस धरा पर अवतरण होता है ब्रम्हाकुमारी चंद्रकला दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि परमात्मा शिव के अवतरण पश्चात उनके दिव्य कर्तव्य को जो घोर कलियुगी दुनिया का परिवर्तन कर नए स्वर्णिम सृष्टि की स्थापना करना है,

सभी देवी देवताओ पर हम सुगंधित फुल व फल चढ़ाते है किंतु शिवलिंग पर हम अक के फुल, धतुरा, बेलपत्र, समर्पित करते है जिसका तात्पर्य है कि हम अपने बुराईयो, दुगुर्णो, द्वेष, ईष्र्याभाव को उन पर अर्पित कर देते है क्योकि परमात्मा शिव ही हमारे विकारो को हर कर हमे श्रेष्ठ चरित्रवान देव तुल्य बना देते है तभी तो उनका एक नाम हर हर महादेव भी गाया हुआ है।

मुख्य अतिथि डोमेश्वरी वर्मा ने ओमशांति के महत्व को समझाते हुए कहा कि सच्चे सुख, शांति की प्राप्ति मनुष्य आत्माओ का मूल कर्तव्य है स्वयं परमात्मा शिव के द्वारा सिखलाया जाने वाले राजयोग व परमात्मा द्वारा दी जाने वाली शिक्षा से हमे सच्ची सुख, शांति व खुशी प्राप्त होगी।

विशिष्ट अतिथि चंद्रशेखर चंद्राकर ने प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में दी जाने वाली शिक्षा मानव कल्याणार्थ है इससे समाज को नई दिशा मिल रही है, अतः हर अवसर पर सहयोग के लिए अपने वचन बद्धता को जाहिर किया। \

कार्यक्रम के अंत में सेवा केन्द्र संचालिका ब्रम्हाकुमारी लता दीदी ने उपस्थित जन समूह को राजयोग व आंतरिक शांति की गहन अनूभूति कराई एवं 24 फरवरी से प्रातः एवं सायं प्रारम्भ हो रहे राजयोग शिविर की जानकारी दी।

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