अंगिरा ऋषि के दर्शन से होती है भक्तो की मनोकामना पूर्ण

पूर्ण-पुरातन अंगिरा ऋषि आश्रम की हो रही है उपेक्षा

राज शेखर नायर

नगरी। पुरातन मान्यताओं के अनुसार सप्त ऋषियों मे सबसे वरिष्ठ अंगिरा ऋषि को मना जाता है। सिहावा मे महर्षि श्रृंगी ऋषि के आश्रम के दक्षिण दिशा ग्राम पंचायत रतवा के समीप स्थीत पर्वत को महर्षि अंगिरा ऋषि की तप भूमि क्षेत्र कहा गया है।

इस पर्वत को श्रीखंड पर्वत के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक महत्व की इस आश्रम को पर्यटन स्थल के रूप विकासत किये जाने की दिशा मे प्रयास किये जाने की आवश्यकता है।

पौराणिक गाथाओं मे अंगिरा ऋषि की तप की महिमा का विवरण मिलता है। आश्रम के पुजारी मुकेश महाराज के अनुसार प्राचिन काल की बात ब्रम्हऋषि अंगिरा अपने आश्रम मे कठोर तपस्या मे लीन थे ।

वे अग्नि से भी अधिक तेजस्वी बन जाना चाहते थे। अपनी कठिन तपस्या से महा मुनि अंगिरा संपूर्ण संसार को प्रकाशित करने लगे।

आज पर्वत शिखर पर स्थित एक छोटी सी गुफा मे अंगिरा ऋषि की मूर्ति विराजमान है। कहते है की पुरातन मूर्ति जर्जर हो कर खंडित हो चुकी थी।

तब आसपास के 12 ग्राम के भक्तो ने मिलकर एक समिति बनाई, व समिति को नाम दिया गया श्री अंगिरा ऋषि बारह पाली समिति उस समिति के सदस्यों ने पर्वत शिखर पर अंगिरा ऋषि की मूर्ति की स्थापना की साथ ही भगवान शिव, गणेश, हनुमान की मूर्तियों की भी स्थापना की।

पर्वत के नीचे एक यज्ञा शाला देखा जा सकता है । कहते है वहां अंगिरा ऋषि का चिमटा वा त्रिशूल आज भी पूजे जाते है।

इस पर्वत मे सात से भी अधिक गुफाएं है इन गुफाओ में से एक मे निरंतर एक दीप प्रज्वालित हो रही है, वहाँ आज भी अंगिरा ऋषि जी का निवास है ऐसी मान्यता है।

पर्वत के शिखर पर एक शीला मे पद चिन्ह बना हुआ देखा जा सकता है, कहते ही ये पदचिन्ह श्री राम जी के है, उनका वनवास काल मे अंगिरा आश्रम मे आगमन हुआ था।

तब यहाँ उनके पैरों के निशान बने। 1995 मे धमतरी के मुजगहन निवासी बिसात राम जब अंगिरा ऋषि के दर्शन करने पर्वत शिखर पर चढे तो वे अंतिम सांसो तक नीचे नहीं उतरे, उनका देहांत पर्व शिखर पर अंगिरा ऋषि के चरणों मे हुआ।

पर्यटन विभाग की अनदेखी के चले आश्रम का विकास नहीं हो सका । ग्रामवासियों व समिति के सदस्यो के सहयोग से राम,जानकी व् माँ दुर्गा की मंदिरों का निर्माण कराया गया।

नवरात्र मे भक्तो द्वारा मनोकामना जयोति प्रज्वलित की जाती है। अघन पूर्णिमा पर्व मे श्री राम नवमी सप्तमी का आयोजन किया जाता है।

सिहावा की सप्ताह ऋषियो की इस तपो भूमि के इन पवित्र आश्रमो की जीर्णोद्धार व देखभाल की आवश्यकता है। ये आश्रम पुरातन महत्व के है, पुरातत्व विभाग इन आश्रमो को संरक्षित करें ।

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