करोड़ो की लागत से बना एनीकेट असमाजिक तत्वों का हो रहा शिकार,, संबंधित अधिकारी नही दे रहे ध्यान

बालोद ब्यूरो चीफ ढालेंद्र कुमार

गुंडरदेही बघमरा में तांदुला नदी पर लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से बना एनीकेट आज अपना अस्तित्व खोने की कगार पर है। शासन प्रशासन द्वारा रख रखाव के अभाव में असामाजिक तत्व एनीकेट को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिसका खामियाजा नगर पंचायत सहित आसपास के दर्जनों ग्रामीणों को भुगतना पड़ सकता है। दरअसल सोमवार को रात्रि करीब 11:00 बजे असामाजिक तत्वों द्वारा तांदुला नदी में बने एनीकेट के लगभग 11 गेट को खोल दिया गया था। इसकी सूचना मिलने पर नगरवासी डिलेश्वर सोनकर, अशोक सोनकर एवं पार्षद हरिश निषाद जब गेट को बंद करने पहुंचे तो नदी का लगभग एक फिट पानी बह गया था। वही जानकारी मिलते ही नगर पंचायत गुंडरदेही के पार्षद शंकर यादव एवं टीका राम निषाद भी मौके पर पहुंचे।

इस घटना के बाद पार्षदों ने आक्रोशित होते हुए कहा कि बीते 1 साल में लगभग यह चौथी घटना है। विभागीय अधिकारियों द्वारा कार्यवाही नहीं होने के कारण असामाजिक तत्व का हौसला बुलंद होते जा रहा है। अगर जल्द ही कार्यवाही नही हुआ तो आसपास के किसान कलेक्टर से शिकायत करेंगे। क्योकि यह एनीकेट नगर पंचायत गुंडरदेही के लोगों के लिए निस्तारी एवं आसपास के ग्रामों के किसानों की सिंचाई का बहुत बड़ा साधन है।

प्रतिवर्ष दिसम्बर व जनवरी में खोला जाता है गेट, आज एक फिट पानी बहा

पार्षद टीकाराम निषाद ने बताया कि जबसे एनीकेट का निर्माण हुआ है, तब से हर साल दिसंबर एवं जनवरी माह में असामाजिक तत्वों द्वारा एनीकेट के गेट को खोल दिया जाता है। इस वर्ष तो असामाजिक तत्वों ने लगभग 4 बार गेट खोले है। जिससे नदी का सैकड़ो मिलीमीटर पानी बह गया। पार्षदों ने बताया कि सोमवार को रात्रि करीब 11 बजे गेट खोला गया था। जिसको सुबह 4 बजे बंद किया गया। इस दौरान एनीकेट से लगभग 1 फीट पानी बह गया।

रेत माफियाओं की हरकत है : पार्षद

पार्षद हरीश निषाद ने अपनी मंशा जाहिर करते हुए कहा कि प्रतिवर्ष जनवरी एवं फरवरी माह में एनीकेट का गेट खुलना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि दिसंबर माह में कुछ रेत माफियाओं द्वारा अवैध रूप से रेत का उत्खनन एवं परिवहन करते हैं। ऐसे में प्रशासन को इनपर नजर रखकर कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए। अगर जल्द ही इन पर कार्यवाही नहीं किया गया तो नगरवासियों सहित आसपास के किसान को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

24 घण्टे होता है पानी का रिसाव

पार्षदों ने बताया कि आज से लगभग 6 वर्ष पूर्व करोड़ों रुपए की लागत से आसपास के दर्जनों ग्रामों के किसानों को लाभ देने जल संसाधन विभाग द्वारा इस एनीकेट का निर्माण किया गया था। परंतु रखरखाव के अभाव में आज यह एनीकेट अपना अस्तित्व खोने की कगार पर है। एनीकेट से लगातार 24 घंटे पानी का रिसाव हो रहा है। इसकी सूचना लिखित में विभागीय अधिकारियों को भी दे चुके हैं। लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button