पशु व्यापारी हत्याकांड : अदालत ने आठ गौ रक्षकों को दिया दोषी करार

झारखंडः

झारखंड में शव पेड़ से लटकाने के मामले में आठ ‘गौ रक्षक’ दोषी करार देते हुए यहाँ के एक अदालत ने गुरुवार को इनकी सज़ा का एलान करने का निर्णय लिया है.

एक पेड़ की दो समानांतर टहनियों से लटकती शवों की तस्वीर जब सामने आई थी पूरे देश में सुर्खियां बनी थीं. यह झारखंड में मॉब लिंचिंग की पहली घटना थी. अभियुक्तों को शक़ था कि वे (मृतक) गायों की खरीद-बिक्री करते हैं. इस मामले की सुनवाई फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही थी.

फांसी या उम्रकैद

अदालत में इस मामले में पीड़ित पक्ष की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अब्दुल सलाम ने बीबीसी को बताया कि सुनवाई के दौरान कुल 11 लोगों की गवाही कराई गई थी. उन्होंने बताया कि पुलिस रिपोर्ट में पहले सिर्फ एक आरोपी नामज़द किए गए थे.

जांच के बाद एफ़आईआर में सात और नाम जोड़े गए. अदालत ने इन्हें हत्या करने और उससे जुड़े साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश का दोषी माना है. लिहाजा, भारतीय दंड विधान (आईपीसी) की धारा 302 और 201 के तहत उन्हें सजा सुनाई जाएगी. इसमें अधिकतम फांसी और न्यूनतम उम्रक़ैद की सज़ा का प्रावधान है.

वह साल 2016 के मार्च महीने की 18 तारीख थी. दिन शुक्रवार. झाबर गांव में अल सुबह किसी युवक ने सखुआ के पेड़ से लटकती लाशें देखीं. पहले तो वह डर गया लेकिन उसने भागकर गांव के दूसरे लोगों को यह बात बतायी.

उस पेड़ के नीचे कई गांवों के लोग पहुंच गए. इसकी सूचना बालूमाथ थाने के दी गई. पुलिस आई, शवों को नीचे उतारा, तो उनकी पहचान पड़ोसी नावादा गांव के मज़लूम अंसारी और आराहरा के इम्तियाज़ खान के तौर पर हुई.

उस समय कोई यह बताने को तैयार नहीं था कि इनकी हत्या किसने की और इन्हें पेड़ से किसने लटकाया. हालांकि, पुलिस ने कुछ ही घंटे बाद झाबर गांव के कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

तब यह बताया गया कि झाबर के ही कुछ लोगों ने ये हत्याएं की क्योंकि उन्हें शक़ था कि ये दोनों लोग पशुओं का व्यापार करते थे. गिरफ्तार किए गए लोग गौ क्रांति दल नामक संगठन से जुड़े थे. इनमें से कुछ का नाता बजरंग दल से होने की भी बात चर्चा में आई. हालांकि, बजरंग दल के पदाधिकारी इससे इनकार करते हैं.

इंसाफ मिला, अब फांसी की उम्मीद

मज़लूम अंसारी की विधवा शायरा बीबी इस फैसले से खुश हैं. उन्हें उम्मीद है कि उनके शौहर के हत्यारों को अदालत फांसी की सजा देगी. इन दिनों अपने मायके में रह रही शायरा ने बताया कि अदालत से जमानत पर छूटने के बाद उन अभियुक्तों ने उन्हें गवाही नहीं देने की धमकी दी थी. उन लोगों ने कहा था कि गवाही देने पर उनकी भी हत्या करा दी जाएगी.

शायरा बीबी ने बीबीसी से कहा, ”बस इतनी मांग है कि जैसे उन लोगों ने मेरे शौहर को फांसी के फंदे से लटका कर मार दिया, वैसे ही जज उन्हें भी फांसी पर लटका दें. उन लोगों ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी. अब कोर्ट पर ही भरोसा है कि वह इंसाफ़ करेगा.”

इम्तियाज़ ख़ान की मां नजमा बीबी इस ख़बर को सुनते ही रोने लगीं. उन्होंने बताया कि 12 साल का इम्तियाज़ धार्मिक प्रवृति का था, जिस दिन उसकी लाश मिली वो जुम्मे का दिन था.

लाश पेड़ से लटकती मिली

नजमा बीबी ने बीबीसी से कहा, ”दो-दो बेटियां शादी के लायक हैं. बड़ा लड़का बीमार है और कोई काम नहीं करता. उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है. मेरे शौहर के पैर टूटने के बाद से इम्तियाज ही घर का खर्च चलाता था.

अब मेरे शौहर मनरेगा का कुछ काम करते हैं तो हमारे लिए रोटी का इंतजाम होता है. हत्यारों ने उसकी हत्या से पहले उसे बुरी तरह पीटा भी था. अब अदालत इंसाफ करे और उन्हें भी फांसी की सजा दे.

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इन हत्याओं की तुलना दादरी कांड से की थी. पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद उन्होंने सरकार से मांग की थी कि इनके लिए मुआवजे का प्रबंध किया जाए. तब माकपा नेत्री वृंदा करात ने भी झाबर, नवादा और आराहरा गांवों में आकर लोगों से बातचीत की थी.

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