छत्तीसगढ़

पशुपालन नही दे रहा ध्यान, मवेशियों में छाया संकट का बादल, शासन की सभी महत्वकांक्षी योजनाएं धरातल पर तोड़ रही दम

कोरबा:भारत देश आदिकाल से गोपालक देश रहा है । इस देश में गाय को एक जानवर के रूप में नहीं बल्कि एक लक्ष्मी के रूप में उपयोगी जानवर के रूप में देखा जाता है । गाय को लक्ष्मी के रूप में देखने के पीछे कारण यह था कि गाय वास्तव में बहुत उपयोगी जानवर है और भारतीय लोगों को इसकी उपयोगिता समझाने के लिए इसे मां लक्ष्मी का दर्जा दिया गया । गाय का जीवन से मरण तक हर रूप में उपयोगी गुणों ने गाय को भारतीयो में पूज्य बना दिया । वैदिक युग में और उसके बाद की युगों तक भी गाय समृद्धि का प्रतीक मानी जाती थी। किसी के गायों की संख्या के आधार पर कोई व्यक्ति की अमीरी का निर्धारण होता था। गाय के गोबर से लेकर दूध के अनेक उत्पाद मानव के लिए हमेशा से उपयोगी रहे हैं।

यही कारण है कि भारत में गाय को लक्ष्मी या कामधेनु कहा गया परंतु कालांतर में धीरे धीरे बाजारीकरण के कारण गाय का महत्व कम होने लगा । लोग गाय पालने की जगह कुत्ते पालने लगे शहरों में कोई व्यवस्था ही नहीं थी और गांव में भी धीरे धीरे गाय पालने की प्रथा कम होने लगी है क्योंकि धीरे धीरे शहरों की तरह गायों में गांव में चारागाह खत्म होते जा रहे थे। कृषि के आधुनिक उपकरणों के कारण भी गाय और बैलो का महत्व कम होने लगा था। गांव में अनेक रोजगार परक योजनाएं चलने के कारण भी लोगो को चरवाहे मिलने बंद हो रहे थे । इन सब का प्रभाव गाय पालन पर अवश्य ही पड़ा और धीरे-धीरे गाय पालन कम होने लगा गायों को चराने के लिए चारागाह भी नहीं मिल रहे थे । ऐसे बहुत सारे गांव में गाय पालन धीरे धीरे बंद हो रहा है जबकि गाय का पालन न केवल मानव के लिए स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है बल्कि देश के

समाज के ,और दुनिया के पर्यावरण के लिए बहुत आवश्यक है। इन्ही सब कारणो को सोच मे रखकर और सबसे आवश्यक ग्रामीण लोगो को गाँव मे ही रोजगार उपलब्ध कराने की दृष्टि से तथा भूपेश सरकार ने भारत की आदि परंपरा को जीवित करने के लिए कुछ योजनाएं शुरू की जो छत्तीसगढ़ में और भारत में शुरू करने वाले पहले मुख्यमंत्री हुए जैसे नरवा गरवा ,घुरवा ,औउ बारी । इसके अलावा गोधन योजना,गौठान योजना भारत की अर्थव्यवस्था के रीढ़ कृषि और कृषकों को जीवन देने के लिए था ।भारतीय कृषि का आधार हल बैल गाय आदि रहा है

साथ ही गांव में ही रह कर गांव में रोजगार प्राप्त करने के लिए भूपेश सरकार किया महत्वकांक्षी योजना है जिसमें गांव के ग्रामीणों को रोजगार भी मिल जाए उन्हें अन्य राज्य में कमाना खाना ना जाना पड़े और साथ ही पर्यावरण भी सुरक्षित रहे सोच को लेकर यह सारी योजनाएं शुरू की गई है परंतु योजना जिन पवित्र उद्देश्य को लेकर शुरू की गई थी उनका लेश मात्र भी पूरा होता हुआ।

परन्तु इसके बावजूद गौठान के बजाए सड़क में गाय

आज भी जिन गांवों मे गोठान है वहाँ भी गायों को सड़कों में आराम से बैठे देखा जा सकता है और गायों के कारण रात में होने वाली दुर्घटना बढ़ जाती है सबसे बड़ी बात है की जब कहीं तभी किसी गाय की किसी दुर्घटना में टकराकर मौत होती है वह समय गाय सेवक आकर गाय के महत्व पर उसके उपयोगी होने पर उसके धार्मिक कारणों पर भाषण तो देते हैं परंतु यही गौ सेवक गाय पालकों को यह नहीं समझा पाते की सरकार ने यह सारी योजनाएं जिन उद्देश्यों को लेकर की है और इन उद्देश्य के प्राप्त करने मे उनकी क्या भलाई है ,क्यो नही समझा पाते जो समझ से परे हुए है ।

नहीं दिखाई दे रहा है आज भी गौठान की व्यवस्था सरपंच से लेकर जनपद ,जनपद से लेकर जिला अधिकारी तक लापरवाह

शासन द्वारा अनेक महत्वकांक्षी योजना गौठान व अन्य बनने के बाद आवारा पशु सड़कों में नजर आते हैं हम सभी जानते हैं कि आवारा पशुओं के कारण सड़कों की दुर्घटना बहुत बढ़ जाती है । इसके अलावा जो किसान गाय को सूखे अवस्था (जब गाय दूध न दे रही हो )में पाल नहीं सकते जो भी अपनी गायों को गोठान में रख सकें और सूखी गायो से भी उन्हें लाभ प्राप्त हो सके परंतु किसी योजना का अच्छा होना ही पर्याप्त नहीं है उसको लागू करवाने लोग और जिनके लिए योजना बनाई गई है उन लोगों की भी दिलचस्पी जब तक उस योजना के पालन करने में ना हो हमेशा की तरह यह सारी योजनाएं भी दम तोड़ते दिखती है।

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