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10 मांगों को लेकर अन्ना हजारे का सत्याग्रह

दिल्ली:एक बार फिर 6 साल बाद समाजसेवी अन्ना हजारे आंदोलन की राह पर है. अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर भ्रष्टाचार और किसानों की समस्‍याओं पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी, जिसके बाद गांधी जयंती के मौके पर राजघाट पर एक दिन का सत्याग्रह पर बैठे.मोदी सरकार भ्रष्टाचार को रोकने में फेल है और जनलोकपाल व लोकायुक्त को लेकर गंभीर नहीं है. अन्ना ने कहा अगर सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती तो दिसंबर या अगले साल जनवरी से फिर वे संघर्ष के लिए मैदान में उतरेंगे.

अन्ना की दस मांगे

1- भ्रष्टाचार के रोकने वाले कानून जनलोकपाल और राज्य में लोकायुक्त नियुक्त करने की मांग

2- किसानों की समस्याओं को लेकर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करे.

3- देश के अलग राज्य में किसान आंदोलन कर रहे हैं और आत्म हत्या भी, लेकिन सरकार किसानों के मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं

4- विदेशों में जमा काला धन को वापस भारत लाया जाए. नोटबंदी से देश छुपाए काला धन का जनता को हिसाब मिले.

5- नागरिक संहिता पर अमल हो.

6- किसानों को उपज के पैदावारी के आधार पर उचित दाम मिलना चाहिए.

7- राजनीतिक दलों को भी सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में लाया जाना चाहिए, सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसका आह्वान किया है.

8- देश में नारी सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए. महिलाओं को हो रहे अन्याय के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाए.

9- गांधी के सपने वाला चाहिए देश. आजादी के 70 साल बाद भी स्वतंत्रा सेनानियों का सपना साकार नहीं हो सका

10- लोकपाल का मुख्यालय, सीवीसी, सीबीआई और अधिकारीयों का स्तर और धारा 44 में लोकपाल के दायरे में रखे गये अधिकारीयों और कर्मचारियों की संपत्ती घोषित करने के बारे में प्रावधान हो.

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