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भड़काऊ भाषण देने में आजम खां पर एक और मुकदमा

रामपुर : भड़काऊ भाषण देने के आरोप में पुलिस ने गठबंधन प्रत्याशी और सपा के राष्ट्रीय महासचिव मुहम्मद आजम खां के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। उन पर चुनावी जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर सरकारी अफसरों के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करने का आरोप है। भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ पश्चिम उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने टांडा थाने में आजम के खिलाफ तहरीर दी थी। हालांकि मुकदमा उडऩ दस्ता प्रभारी पवन कुमार की ओर से दर्ज कराया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच अप्रैल को टांडा की जनता राइस मिल मैदान में गठबंधन प्रत्याशी आजम ने जनसभा की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि संवैधानिक कुर्सियों पर बैठे लोग मुजरिम हैं। सजायाफ्ता कल्याण ङ्क्षसह को गवर्नर बना दिया गया है। इसके साथ प्रधानमंत्री को मुसलमानों का कातिल व धर्म का ठेकेदार कहते हुए मुख्यमंत्री पर भी अमर्यादित टिप्पणी की थी। नीच तक कहा था। प्रशासनिक अधिकारियों को जालिम कहते हुए कहा था कि शिक्षा के मंदिर की दीवारें तुड़वाई गई हैं। उर्दू गेट इसलिए तोड़ दिया गया कि उसका नाम उर्दू गेट था। यह भी कहा कि मुसलमानों एक हो जाओ। भाजपा के नेता सारे मुसलमानों को गाली देने के अलावा कोई काम नहीं करते। चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाया कि आयोग ने मेरे बोलने पर मेरी जुबान काट दी है। टांडा पुलिस ने आजम खां के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम समेत भड़काऊ भाषण देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और प्रत्याशी आजम खां ने कहा कि भाजपा और प्रशासन हमें संसद जाने से रोकना चाहता है। जनता हमारे साथ है और भाजपा की कोई साजिश सफल नहीं हो पाएगी। अधिकारी हमारे खिलाफ मुकदमे लिखा रहे हैं, लेकिन हम इससे डरने वाले नहीं हैं।

धमोरा के गांव पुरैना, धमोरा, पैगंबरपुर में जनसभा में आजम भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जमकर बरसे। कहा कि भाजपा नेताओं ने पिछले लोकसभा चुनाव में झूठे वादे कर जनता को ठग लिया था। अब जनता सारी बाते समझ चुकी है। जिलाधिकारी पर भी निशाना साधा। कहा कि प्रशासन हमे परेशान करने में लगा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व कैबिनेट मंत्री मो. आजम खां के शस्त्र लाइसेंस को जिलाधिकारी की ओर से निलंबित करने के आदेश को रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए आजम को चुनाव बाद की तारीख दी जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने दिया है। याचिका पर अधिवक्ता इमरानुल्ला खां ने बहस की।

प्रकरण के अनुसार 2014 के लोकसभा चुनाव में रामपुर में बवाल हुआ था। इसको लेकर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पुलिस ने आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया है। इसी आधार पर रामपुर के जिलाधिकारी ने आजम का शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी की है। पूछा है कि क्यों न लाइसेंस निरस्त कर दिया जाए। याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची की पत्नी ने निर्वाचन आयोग में जिलाधिकारी की शिकायत कर उनके तबादले की मांग की है। जिससे नाराज होकर जिलाधिकारी ने यह कार्रवाई की है।

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