छत्तीसगढ़

जनविरोधी रमन सरकार ने किसानों को 15 बरसों से किया निराश : कांग्रेस

रायपुर: शिवरतन के बयान पर कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा है कि जनविरोधी रमन सरकार ने 15 वर्षों में किसानों को सबसे ज्यादा निराश किया है। भाजपा सरकार से किसान-मजदुर सबको घोर निराशा हुयी है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में मानसून की बेरूखी के चलते अवर्षा, अल्पवर्षा व खण्ड वर्षा से किसान भाईयों की खरीफ फसल को भारी क्षति, नुकसान होने से अकाल पड़ा है। कांग्रेस ने प्रदेश के किसान भाईयों की लड़ाई लड़ते हुए उनका हक दिलाये जाने हेतु लगातार राज्य सरकार पर दबाव बनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार को 21 जिलों के 96 तहसील को सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ा, किन्तु शासन द्वारा सूखा प्रभावित जिलों के लिये जिलेवार सूखा क्षतिपूर्ति राशि घोषित किये जाने के पश्चात भी सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को अभी तक सूखा क्षतिपूर्ति व फसल बीमा क्षतिपूर्ति राशि प्रदाय नहीं कर किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
राज्य सरकार की किसानों की दयनीय स्थिति पर गंभीर नहीं है। सरकार का अंतिम बजट भाजपा की मजदूरकिसान विरोधी सोच का जीता जागता सबूत रहा है। किसानों को बोनस और समर्थन मूल्य के अंतर की बकाया राशि देने के तक लिये कोई प्रावधान नहीं किया जिससे किसानों को निराशा हुयी।
रमन सरकार ने किसानों को हमेशा की तरह धोखा ही दिया है। बोनस तथा समर्थन मूल्य का वादा सिर्फ वादा बन कर रह गया है। 96 तहसील सूखाग्रस्त है। किसानों की ऋण माफी करने की जगह, मजदूरों को राहत पहुंचाने की जगह, मनरेगा का बजट 2196 करोड़ से घटा कर 1421 करोड़ कर दिया जो एक तरह से गरीबों के प्रति अपराध है। गांव की ओर देखने की बात मुख्यमंत्री रमन सिंह ने की है। यह दृष्टि ऐसी पड़ी है कि अपने अंतिम बजट तक में रमन सरकार ने गांव-गरीब मजदूर, किसान की उपेक्षा की है। गांव और मजूदरों के रमन सरकार को उपेक्षापूर्ण रवैया का महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के बजट प्रावधान घटा दिया जाना जीताजागता सबूत है।
जिसे पिछले साल 2166 करोड़ से घटाकर 1419 करोड़ कर दिया गया है। जबकि इस साल छत्तीसगढ़ की 96 प्रतिशत भू-भाग अवर्षा और सूखे का शिकार है। किसानों की कर्जमाफी का भी कोई प्रावधान नहीं किया।
 धोखाधड़ी की परंपरा जो भाजपा ने अपने तीनों कार्यकाल 2003 फिर 2008 और 2013 में शुरू की वह 2018 में भाजपा सरकार के अंतिम बजट में जारी रही। न युवाओं से किये गये रोजगार के वायदे पूरे किए गए और न किसानों को राहत दी गयी। भाजपा के संकल्प पत्र के वायदों को पूरा करने के अंतिम अवसर पर भी मुख्यमंत्री ने जनता को ठेंगा दिखा दिया। बजट में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2100 और बोनस 300 रू. देने के लिये कुछ नहीं किया गया। बजट में किसान कल्याण कोष की स्थापना का कोई प्रावधान नही है। गोचर विकास बोर्ड के वायदे फुर्र हो गए।
वायदा था छत्तीसगढ़ को भारत की कृषि राजधानी बनाने का लेकिन हकीकत में किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। कृषि मूल्य आयोग भी बनाने की भी कोई पहल भाजपा सरकार ने नहीं की है।
रमन सरकार के अंतिम बजट से भी किसानों को निराशा ही हुई है। बजट से किसान, नौजवान, महिलायें, शिक्षाकर्मियों, मजदूर सबको निराशा हुयी है। बोनस की बकाया राशि देने के लिये कोई प्रावधान नहीं है जिससे किसानों को निराशा हुयी है।किसानों की आय लागत का डेढ़ गुना करने और स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू करने की बात सिर्फ जुमला साबित हुयी। समर्थन मूल्य 2100 रू. और बोनस 300 रू. के हिसाब से सरकार किसानों का दर से 55500/ प्रति एकड़ की कर्जदार है।
क्योंकि प्रति एकड़ सरकार द्वारा किसानों से खरीदी जाने वाली धान की मात्रा 15 क्विंटल के हिसाब से भुगतान में सालाना 12000 रू. का अंतर है। सरकार ने सिर्फ एक साल 4500/ बोनस दिया है बाकी राशि बकाया है। बजट में भी इस दिशा में कोई प्रावधान नहीं होना किसानों के साथ अन्याय है। किसानों के लिये न कर्ज माफी की न बिजली बिल माफी का प्रावधान। नये कालेज, शिक्षकों, प्राध्यापको की भर्ती की कोई चर्चा नहीं। पिछले वर्ष टमाटर और सब्जी फेके गये इसके संबंध में कोई सोच नहीं है। कोल्डस्टोरेज और प्रसंस्करण के लिये कोई सोच नहीं है। गौ-रक्षा पर रमन सरकार का कोई ध्यान नहीं।
राज्य सरकार प्रति व्यक्ति आय बढ़ने का जश्न मना रही है। जबकि यह आंकड़ा सर्वाधिक चिंताजनक है। प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 92000 हो गया जबकि 58 लाख गरीबी रेखा के नीचे बने हुये है। जिसका अर्थ है गरीब और गरीब तथा अमीर और अमीर हुये है। क्योंकि प्रति व्यक्ति आय का मतलब सभी लोगों का आय का औसत है।
कुल मिलाकर रमन सरकार से महिला, किसान, मजदूर, आदिवासी, अनुसूचित जाति, युवा बेरोजगार के जीवन का अंधकार दूर होने की संभावना नहीं है।

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