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किसान हिंसा में शामिल किसी भी दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा: एसएन श्रीवास्तव

गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस के कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने कहा

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा में 394 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. इनमें से कुछ ICU में हैं. पुलिस ने 25 से अधिक एफआईआर दर्ज की है. 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है.

वहिबन इस मामले में दिल्ली पुलिस के कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने कहा है कि हिंसा में शामिल किसी भी दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा में किसान नेता भी संलिप्त थे. किसान नेताओं से भी पूछताछ की जाएगी.

एसएन श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने स्थितियों को उपयुक्त तरीके से निपटा, जिसके चलते हिंसा के दौरान पुलिस कार्रवाई में एक भी व्यक्ति मारा नहीं गया. बता दें कि दिल्ली पुलिस ने योगेंद्र यादव, राकेश टिकैत, दर्शन पाल सिंह और मेधा माटकर समेत 37 किसान नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

श्रीवास्तव ने कहा कि ट्रैक्टर रैली दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे के बीच होनी थी और किसान संगठनों ने इसके लिए तय की गयी शर्तों का पालन नहीं किया. हमने उनसे अपील करते हुए कहा किन 26 को देश गणतंत्र दिवस मना रहा है अभी रैली नहीं करें. उन्होंने मना कर दिया.

एसएन श्रीवास्ताव ने कहा कि किसान नेताओं को लिखित प्रस्ताव दिया गया. इसमें कहा गया सिक्युरिटी को ध्यान में रखते हुए ये तय किया गया कि 12 बजे ट्रैक्टर मार्च शुरू हो. दूसरा मार्च किसान लीडर लीड करे. जत्थे के साथ लीडर चले. 5000 से ज्यादा ट्रैक्टर नहीं हो और कोई हथियार भी न हो. लेकिन वो अपने वादे से मुकर गए.

एसएन श्रीवास्ताव ने कहा कि किसान नेता सुबह 6.30 बजे से ही बेरिकेड्स तोड़ने के लिए तैयार हो गए. मुकरबा चौक पहुंचे. सतनाम सिंह पन्नू ने भड़काऊ भाषण दिया. सभी किसान अलग-अलग बॉर्डर से चल पड़े. जबकि समय 12 बजे तय किया गया था.

भाषण के बाद भीड़ आगे की तरफ बढ़ी. उन्होंने कहा कि पुलिस ने संयम बरता है. आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया. किसान संगठन लाल किला तक पहुंचे और वहां अपना झंडा लगा दिया.

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