ज्योतिष

कुम्भ लग्न 2020

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव कुंडली विशेषज्ञ और प्रश्न शास्त्री 8178677715, 9811598848

गोचर

इस वर्ष शनि 24 जनवरी को मकर राशि में द्वादश भाव में प्रवेश रहेंगे। वर्ष के प्रारम्भ में राहु मिथुन में पंचम भाव में होंगे और 19 सितम्बर के बाद वृष राशि में चतुर्थ भाव में प्रवेश करेंगे। 30 मार्च को गुरु मकर राशि में द्वादश भाव में प्रवेश करेंगे एवं वक्री होकर 30 जून को घनु राशि में एकादश भाव में गोचर करेंगे और फिर से मार्गी होकर 20 नवम्बर को मकर राशि में द्वादश भाव में आ जाएंगे। 31 मई से 8 जुन तक शुक्र अस्त रहेंगे।

व्यवसाय

व्यवसाय के दृष्टिकोण से यह वर्ष सामान्य फलदायक रहेगा। वर्ष के शुरुआत में सप्तम स्थान पर गुरु की दृष्टि साझेदारी व्यापार का योग बना रहे है। यदि आप कुछ नया करने जा रहे हैं तो उस क्षेत्र से जुड़े अनुभवी व्यक्तियों की सलाह जरूर लें। कार्य स्थल पर अपने परिवार के व्यक्तियों को सम्मिलित न करें। जोखिम उठाने से बचें। निवेश के मामले में सावघानी बरतें अन्यथा व्यापार में हानि उठानी पड सकती है। नौकरी करने वालों के लिए कुछ तनाव की स्थिति रह सकती है तथा स्थानान्तरण के भी योग बन रहे हैं।

वित्त

आर्थिक दृष्टि से यह वर्ष सामान्य फलदायक रहेगा। द्वितीय स्थान पर शनि की दृष्टि के कारण धनागमन रहते हुए भी आप इच्छित बचत नहीं कर पाएंगी। कुछ खर्चे तो अचानक आ सकते हैं जिससे आपका आर्थिक स्थिति बिगाड सकता है। अत: पहले से इस मामले को जानकर आप अभी से अतिरिक्त धन संचय कर सकते हैं। आर्थिक निवेश के लिए यह समय बहुत अनुकूल नहीं है। यदि आप निवेश करना चाहती हैं तो उस क्षेत्र से जुड़े लोगों की सलाह जरूर लें। अनावश्यक व्यय से बचें। यात्राओं पर धन व्यय होने के योग हैं। सट्टा व शेयर मार्केट आदि में निवेश करने से बचें।

परिवार

पारिवारिक दृष्टिकोण से यह वर्ष मिला-जुला रहेगा। अधिक व्यस्तता के कारण परिजनों को अधिक समय नहीं दे पायेंगे। परन्तु आपका पारिवारिक माहौल अनुकूल रहेगा। पंचम स्थान का राहु आपके पुत्र का स्वास्थ्य खराब कर सकता है। सन्तान संबंधी चिन्ताएं बनी रह सकती हैं। इस वर्ष आपके भाईयों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा और उनके साथ माधुर्य का समन्वय बना रहेगा। 19 सितम्बर के बाद राहु ग्रह का गोचर चतुर्थ स्थान में होगा। उसके बाद परिवार में कुछ चिन्ता व अनावश्यक घबराहट उपस्थित हो सकते हैं। मां के स्वास्थ्य के मामले में सावधानी की आवश्यकता है।

संतान

संतान के मामले में पंचम स्थान का राहु आपके पुत्र का स्वास्थ्य खराब कर सकता है। सन्तान संबंधी चिन्ताएं बनी रह सकती हैं। उनकी सफलता के मार्ग में कुछ परेशानी आ सकती है। फिर भी वह अपने परिश्रम के बल पर सफलता प्राप्त करेंगे। आपकी दूसरी संतान के लिए समय अनुकूल है। 30 जून के बाद उसका विवाह संस्कार हो सकता है। पंचम स्थान का राहु गर्भवती स्त्रियों के लिए गर्भपात के संकेत लेकर आ रहा है अत: सावधानी बरतें।

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष सामान्य फलदायक रहेगा। जो पेट के मरीज हैं वह अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। राहु व शनि का गोचर मानसिक अशान्ति उत्पन्न कर सकता है। लेकिन आपके स्वास्थ्य पर उसका ज्यादा नकारात्मक प्रभाव नहीं रहेगा। आप रोज सुबह सूर्य की ताजा किरणों का आनन्द लेते हुए सूर्य नमस्कार करें। जिससे आपके शरीर पर किसी प्रकार का बुरा प्रभाव नहीं पडेगा। 19 सितम्बर के बाद समय घीरे-घीरे अनुकूल होना शुरू हो जाएगा। उस समय चर्बी बढ़ाने वाले वस्तु का सेवन कम करें नहीं तो आपका मोटापा बढ सकता है।

शिक्षा

वर्ष के प्रारम्भ में प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए समय शुभ नहीं रहेगा। आप विदेश जाकर तकनीकी शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं तो इसमें कुछ कठिनाई आ सकती है। षष्ठ स्थान पर गुरु एवं शनि की संयुक्त दृष्टि प्रभाव से आप प्रतियोगिता परीक्षा में आगे रहेंगे। सरकारी अफसरों और वरिष्ठ व्यक्तियों का सहयोग प्राप्त होगा, जिससे आपको कार्यों में लाभ प्राप्त हो सकता है परन्तु पंचमस्थ राहु के गोचरीय प्रभाव के चलते बनते-बनते कार्यों में अचानक रुकावट आ सकती है। 19 सितम्बर के बाद रुकावटें समाप्त होंगी तथा सफलता प्राप्ति का मार्ग कुछ सरल होगा।

यात्रा

इस वर्ष आपकी खूब यात्राएं होंगी। 30 मार्च के बाद द्वादश स्थान में शनि एवं गुरु की युति के प्रभाव से विदेश यात्रा के योग बन सकते हैं। यह यात्रा आपके लिए अनुकूल सिद्ध होगी। नवम स्थान पर राहु की दृष्टि के कारण यात्राओं में कुछ मुश्किलें आ सकती हैं परन्तु 19 सितम्बर के बाद इस प्रकार की कठिनाईयों से छुटकारा मिल जायेगा। इस वर्ष आप धार्मिक यात्राओं का आनन्द नहीं ले पायेंगे।

पूजा

धर्म स्थान पर शनि एवं राहु की संयुक्त दृष्टि के कारण आपका पूजा-पाठ, ईश्वर भक्ति आदि में विशेष रूझान नहीं हो पाएगा। आपका मन भी अशान्त रहेगा। 19 सितम्बर के बाद इष्टदेव में श्रद्धा और भक्ति बढ़ेगी। प्रत्येक मंगलवार के दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाएं और हनुमान चालीसा या सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। गरीब व्यक्तियों को काला कम्बल दान करें तथा अनाथ आश्रम में अन्न दान करें। सुबह सुबह पीपल के पेड़ के नीचे जल चढायें और साम के समय वहा चौमुखी दीपक जलाएं। संतान गोपाल मन्त्र का पाठ करें। दुर्गा सप्तशति का पाठ करें।

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