छत्तीसगढ़

आ रहे हैं दिये के अच्छे दिन

– श्रीकांत यदु
दिवाली का त्यौहार यूँ तो खुशियों का पर्व माना जाता है पर एक तबका ऐसा भी था जो दूसरों के घरों को तो रौशन करता था पर उनके अपने घर में अँधियारा था. हम बात कर रहे हैं कुम्भकार बिरादरी की. पिछले कुछ सालों से मिट्टी के दिये बनाने वाले कुम्हारों का त्यौहार खास नहीं होता था. कुम्हार दिन-रात मेहनत करने के बाद भी लागत वसूल नहीं पाते थे. लेकिन इस दफे हालात बदलने की उम्मीद है. वजह है कि देश के मुखिया नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह ने लोगों से इस बार चाइनीज आइटम से दूरी बनाने और मिट्टी के दीयों का उपयोग करने की अपील की है. देश और प्रदेश के आलाकमान के इस अपील के बाद कुम्हारों को भी उम्मीद जगी है कि इस बार उनकी भी दिवाली पहले से बेहतर होने वाली है. मुख्यमंत्री के चाइनीज झालरों से दूरी बनाने की अपील के बाद बलौदाबाजार कलेक्टर राजेश सिंह राणा ने इस पर पहल करते हुए जिले के सभी सरकारी इमारतों को इस बार मिट्टी के दीयों से रोशन करने का आदेश जारी किया है, जिसे सभी का समर्थन मिल रहा है. लोगों में चाइनीज आइटम को लेकर विरोध भी बढ़ता जा रहा है जिसकी वजह पिछले दिनों भारत-चाइना की बढ़ती खटास भी है. ऐसे में कुम्हारों को उम्मीद है कि बीते कई सालों से मंद पड़े दीया कारोबार को इस बार संजीवनी मिलेगी. रायपुरा में लम्बे समय से मिट्टी के दिए बनाकर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाले कुम्हार मनोज ने बताया कि बीते कुछ सालों में दीयों की खरीदारी औपचारिकता भर रह गई थी. कई लोगों ने सालों तक नुकसान होने के बाद इस काम को ही छोड़ दिया. पर देश और प्रदेश की इस पहल के बाद हमारी मेहनत को अच्छा प्रतिसाद मिलेगा ऐसी उम्मीद है.

बाजार में 5 रुपयें से लेकर 300 तक के दिये उपलब्ध
इस साल मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग को देखते हुए पारम्परिक दीयों के साथ ही आकर्षक शेप वाले दिये भी कुम्हारों ने तैयार किए हैं. इस बार बाजार में पांच रुपए से लेकर 300 रुपए तक के दीये मौजूद हैं। कई जगह इनको को सजाने का काम भी चल रहा है। मिट्टी के परम्परागत दीयों के साथ डिजाइनर, कलरफुल और आकर्षक शेप वाले दीये भी मिल रहे हैं। कारीगरों की माने तो दीयों के पारम्परिक स्वरूप से स्टाइलिश लुक ग्राहकों को ज्यादा पसंद आ रहा है।

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