अंतर्राष्ट्रीय

अर्मेनिया-अजरबैजान के बीच एक बार फिर संघर्ष विराम की कोशिश तेज

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दोनों देशों से संघर्ष विराम संधि का पालन करने की अपील की

येरेवन: अर्मेनिया और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों की रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ फोन पर बातचीत हुई है. इस बातचीच के बाद आधी रात को दोनों देशों के बीच दोबारा संघर्ष विराम संधि लागू करने की कोशिश का ऐलान किया गया है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दोनों देशों से संघर्ष विराम संधि का पालन करने की अपील की है.

बता दें कि इससे पहले बीते शनिवार को अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच संघर्ष विराम की शर्तों पर सहमति बनी थी. ये बात मास्को में रूस की मध्यस्थता में हुई. रूस ने शनिवार को संघर्ष विराम समझौता कराया लेकिन करीब 10 घंटे से अधिक चली वार्ता फेल हो गई.

कुछ ही मिनटों में दोनों देश फिर से भिड़ गए और एक दूसरे पर संघर्ष विराम संधि उल्लंघन का आरोप लगाया अब रूस ने दोबारा से संघर्ष विराम संधि पालन कराने के प्रयास किए हैं. दोनों देशों से शांति की अपील की है.

इससे पहले का प्रयास हुआ असफल

इससे पहले अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच संघर्ष (Armenia Azerbaijan Conflicts) में दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर नागोर्नो-करबख (Nagorno Karabakh) क्षेत्र में नए हमलों के आरोप लगाए थे.

रूस द्वारा कराई कई युद्ध विराम संधि का आब तक कोई असर नहीं दिखा, लड़ाई तीसरे सप्ताह भी जारी रही. इस बीच तेल और गैस पाइप लाइन को निशाना बनाए जाने की आशंका से पड़ोसियों की चिंता बढ़ गई, अगर ऐसा हुआ तो तबाही मच सकती है.

पुतिन एर्दोगन से कर चुके हैं बात

बुधवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अपने तुर्की समकक्ष रेसेप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) के साथ फोन पर बातचीत भी की.

उन्होंने इस दौरान शनिवार को हुई युद्ध विराम संधि का तुरंत उल्लंघन करने की बजाय इसका पालन कराने के लिए कोशिश करने की अपील की. पुतिन ने मध्य पूर्व (Middle East) के आतंकवादियों के संघर्ष में शामिल होने पर भी चिंता जताई थी.

वहीं तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इस क्षेत्र में लड़ाकों की तैनाती से इनकार किया, लेकिन सीरिया स्थित विपक्षी कार्यकर्ताओं ने पुष्टि की है कि तुर्की ने नागोर्नो-करबख में सैकड़ों लड़ाकों को भेजा है. अब एक बार फिर नए सिरे से संघर्ष विराम संधि का पालन कराए जाने की कोशिश शूरू हो गई हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार इस तरह की कोशिशें जारी हैं.

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