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असम पर सेना प्रमुख के बयान पर भड़का विपक्ष, CPM ने कहा- संज्ञान लें राष्ट्रपति

सेना प्रमुख बिपिन रावत के बांग्लादेशी नागरिकों की असम में घुसपैठ और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) पर दिए गए बयान ने राजनीतिक रूप ले लिया है. आर्मी चीफ के बयान पर AIUDF चीफ बदरुद्दीन अजमल ने भी पलटवार किया है.

उन्होंने ट्वीट किया कि आर्मी चीफ का बयान राजनीति से प्रेरित है जो कि चौंकाने वाला है. वहीं सीपीएम नेता वृंदा करात ने इस मुद्दे पर अपील की है कि राष्ट्रपति को गंभीरता से मामले में संज्ञान लेना चाहिए. बिपिन रावत सेना के राजनीतिकरण का प्रयास कर रहे हैं.

उन्होंने लिखा कि अगर कोई राजनीतिक पार्टी आगे बढ़ रही है, तो ये आर्मी चीफ के लिए किस तरह से चिंता का विषय होता है. उन्होंने कहा कि बड़ी राजनीतिक पार्टियों के कुशासन के कारण ही AIUDF और AAP जैसी पार्टियों का उदय हुआ है. उनके अलावा AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और कई अन्य राजनीतिक पार्टियों ने भी आर्मी चीफ के बयान पर सवाल उठाए हैं.

औवेसी ने ट्वीट किया कि आर्मी चीफ को राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, किसी राजनीतिक पार्टी के उदय पर बयान देना उनका काम नहीं है. लोकतंत्र और संविधान इस बात की इजाजत देता है कि सेना हमेशा एक निर्वाचित नेतृत्व के तहत काम करेगी.

बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी, कांग्रेस-एनसीपी ने की निंदा

कांग्रेस नेता मीम अफजल ने आर्मी चीफ के इस बयान पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि आर्मी के अफसर को राजनीतिक बयानबाजी नहीं करनी चाहिए, जो उन्होंने कहा है कि रावत को ऐसी बयानबाजी से बचना चाहिए.

एनसीपी नेता माजिद मेनन ने कहा कि ये राजनीतिक मामला है इसपर नेताओं को ही बयानबाजी करनी चाहिए, आर्मी चीफ को ये सब शोभा नहीं देता है. बीजेपी नेता शायना एनसी ने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठ देश में बड़ा मुद्दा है, उसपर विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय नज़र बनाए हुए है.

क्या बोले थे आर्मी चीफ?

सेना प्रमुख बिपिन रावत ने एक सेमिनार में कहा था कि जितनी तेजी से देश में बीजेपी का विस्तार नहीं हुआ उतनी तेजी से असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ बढ़ी है. रावत इलाके में होने वाली बांग्लादेशी घुसपैठ और जनसांख्यिकी परिवर्तन को समझाने के लिए उदाहरण दे रहे थे. उन्होंने कहा कि घुसपैठ होने का एक बड़ा कारण जमीन पर कब्जा जमाना भी है.

एक सेमिनार में बोलते हुए सेना प्रमुख ने यहां पर बांग्लादेशी घुसपैठ के बारे में कहा कि उत्तर-पूर्व में बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ के पीछे हमारे पश्चिमी पड़ोसी की छद्म नीति ज़िम्मेदार है.

जनरल रावत ने कहा है कि इस काम में हमारे पश्चिमी पड़ोसी को उत्तरी पड़ोसी का साथ मिल रहा है. उन्होंने कहा है कि उत्तर पूर्व की समस्याओं का समाधान वहां के लोगों को देश की मुख्यधारा में लाकर विकास करने से मुमकिन है.

पूर्वोत्तर से देश के संपर्क मार्ग यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर नौसेना प्रमुख ने कहा कि चीन से मतभेदों के बावजूद अनेक दशकों से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शान्ति बरकरार रही है. हालांकि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा सीमा का अतिक्रमण करने की बढ़ती घटनाएं और डोकलाम में हालिया गतिरोध चीन की बढ़ती मुखरता का प्रतीक है, क्योंकि वह आर्थिक और सैन्य मोर्चों पर प्रगति कर रहा है.

यह घटनाएं सिलीगुड़ी कॉरिडोर की संवेदनशीलता की ओर इशारा करती हैं. सिलीगुड़ी कॉरिडोर या चिकन-नेक वह संकीर्ण भूभाग है जो पूर्वोत्तर के राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है.

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