सेना के इस रिटायर्ड ब्रिग्रेडियर ने मोदी सरकार पर बोला हमला,जानें क्या कहा

बोले- छत्तीसगढ़ में नक्सल ऑपरेशन फैल

रायपुर: सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर प्रदीप यदु ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला .साथ ही छत्तीसगढ़ में नक्सल ऑपरेशन को फैलियर कहा है .राजधानी के एक निजी होटल में प्रेस कांफ्रेंस में रिटायर्ड ब्रिगेडियर प्रदीप यदु ने कहा कि पिछले कुछ सालों से सेना को नीचे लाया जा रहा है. उसके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है.

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही 2014 के बाद 15 अगस्त को पीएम के भाषण के दौरान सेना के अधिकारी को पीछे खड़े होना बन्द करा दिया गया है. 30 जनवरी को होने वाले बिटिंग द रीट्रीट बन्द किया गया. सातवें वेतन आयोग ने सेना की आवाज नहीं सुन रही है. हार्ड एरिया एलाउन्स में सेना के साथ भेदभाव किया जा रहा है.

सेना के पेंशनरों को औसतन 15500 रुपए प्रति माह पेंशन दिया जाता है. उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री अरुण जेटली ने वन रैंक वन पेंशन को लेकर गुमराह किया है. आज तक केंद्र सरकार ने वन रैंक वन पेंशन नहीं दी है. वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर एक हज़ार दिन से पूर्व सैनिकों का आन्दोलन जारी है.

उन्होंने कहा कि अरुण जेटली अमृतसर से चुनाव हारने के बाद पूर्व सैनिकों के विरोधी हो गए. क्योंकि उनके लगता है कि पूर्व सैनिकों ने उन्हें हराया है, जबकि अमृतसर में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक है. प्रदीप यदु ने कहा कि आज भारतीय सशस्त्र सेना की जो तकलीफ है उसके बारे में जानकारी देने मैं यहां आया हूं. आज उन्हें आर्थिक और अन्य परेशानी से जूझना पड़ रहा है. हमारे लिये पहले देश है फिर वो जवान जो हमारे लिए काम करते है उसके बाद भी हम खुश है.

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में 2005-12 तक 1012 जवान शहीद हो चुके है. ये कैसा नक्सल विरोधी ऑपरेशन है. ये फैल नक्सल ऑपरेशन है. ये स्ट्रेटेजिक प्लानिंग नहीं है.

छत्तीसगढ़ में सेना का कोई बड़ा कैम्प नहीं है इसलिए यहां आम नागरिक की जागरूकता सेना के प्रति कम है. 1947 से 1973 तक पे कमीशन अलग था 1973 के बाद जब तीसरा पे कमीशन बिठाया गया जिसमें सेना की पेंशन 70 प्रतिशत से कम कर दी और आईएएस की पेंशन्स बढ़ा दी गई. सेना में नौकरी करने के कारण हमारी सेना इस पर ना कभी बोली है और न बोलेगी. जो भी सरकार सत्ता में है उसका अंतिम हथियार सेना है.

प्रदीप यदु ने कहा कि जब प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते है तब उसके बाईं ओर एक जनरल आफिसर हमेशा खड़ा होता था, लेकिन 2014 के बाद से वहां उन्हें खड़े होने की अनुमति नहीं है. गणतंत्र दिवस परेड़ के बाद 30 अगस्त को राष्ट्र्पति भवन के सामने बीटिंग द रिट्रीट होता था उससे संदेश जाता था कि भारत की सेना इतनी मजबूत है कि सेना ने पर्व समाप्ती की, लेकिन अब ये बन्द हो गया सेना की जगह अब फोक प्रोग्राम होते है. पिछले दो वर्षों से न प्रधानमंत्री जी को न रक्षा मंत्री जी को समय मिला की पुरातन परम्परा के अनुसार चीफ आर्मी ऑफिसर को चाय पर बुलाये.

आज तक 7वें पे कमीशन में सशस्त्र सेना की डिमांड को नहीं सुना गया, लेकिन हमारी सेना में इतनी सहनशीलता है कि वो कभी आवाज नहीं उठाते है. अभी हार्ड एरिया एलाउंस जैसे कोई आईएएस, आईपीएस, आईआरएस जैसे लेह-लद्दाख या गोवाहाटी में अगर पोस्ट होते है उन्हें 48 हजार रुपये एक्स्ट्रा एलाउंस मिलता था, लेकिन हमारे सैनिक जो सियाचिन में है उन्हें क्या मिलता है?.

सेना के आर्मी, नेवी के पेंशनर्स की संख्या 25 लाख है और इनको मिलने वाला बजट 33 हजार करोड़ रुपये मतलब औसतन 15 हजार प्रतिमाह प्रत्येक को, लेकिन सेना के संविलियन्स स्टाफ को और आईएएस, आईपीएस जिनकी संख्या 2.5 लाख इन्हें हर महीने 93 हजार मिलता है.

उन्होंने कहा कि सेना को एनएफयू मिलना चाहिए. इसके खिलाफ मिनिस्ट्री ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है कि सेना को ये नहीं मिलना चाहिए. जो कि ये शर्म कि बात है. देश के मंत्री अरुण जेटली ने देश को गुमराह किया कि सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन दे दी गई है.

अगर दे दी गई होती तो क्या आज भी जंतर-मंतर में पूर्व सैनिक बैठे दिखाई देते. वर्तमान सरकार ने वन रैंक वन पेंशन की परिभाषा बदल दी.2008 से आम फोर्स ट्रिब्यूनल का गठन किया गया, लेकिन जितने यहां के डिसीजन सरकार के विरोध में सैनिकों के पक्ष में आये है. वहीं डिसीजन के खिलाफ मिनिस्ट्री सुप्रीमकोर्ट में याचिका उसके खिलाफ में दायर कर रही है. हिंदुस्तान की जीडीपी का डिफेंस को 1.58 प्रतिशत देने की बात कही गई जो पिछले कई वर्षों से बहुत कम है.

जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक काढ़ा पीडीपी के साथ जम्मू कश्मीर में भाजपा ने सरकार चलाई उस पार्टी के साथ जो हुर्रियत को अपना मानती है. जो अलगाववादियों को अपना मानती है. जब भाजपा को लगा कि अब पानी सर से ऊपर हो रहा तब उन्होंने अभी जुलाई में ये समर्थन वापिस ले लिया.

उन्होंने बताया कि जम्मूकश्मीर में फौजियों पर लोग पत्थर मार रहे है. वहां फौजी के हाथों में बंदूक है लेकिन उसने आज तक गोली नहीं चलाई. वहां राजनीति के चलते फौजियों को ज्यादती कब तक सहने देंगें, गृहमंत्री वहां जाकर जब भाषण देते है और बोलते हैं कि कुछ बच्चे यहां के नादान है वो पत्थरबाजी कर रहे है. जवानों के साथ बर्बरता करने वालो को ये नादान कहते है.

मेजर गोगोई को भी इन्होंने फसाया. उस समय मेजर गोगोई को सारी मीडिया ने दिखाया और वहां के प्रशासक पीडीपी और भाजपा ने उन्हें बलि का बकरा बनाने की सोची. अभी कुछ दिन पहले सुनने को मिला कि वो एक होटल में किसी महिला के साथ बातचीत करते पकड़े गए यदि वो गलत है तो उनका कोर्टमार्शल होना चाहिए.देश में अब तक तीन रक्षा मंत्री सरकार ने बदल दिए.

ये संदेश पूरा विश्व देख रहा है. बाकी मंत्रालयों में तो फेरबदल नहीं हुआ, आज रक्षा मंत्री 2 सौ करोड़ से ज्यादा के बजट को स्वीकृत नहीं कर सकते है. सेना की स्थिति पर 10% पिछली सरकार और आज की मौजूदा मोदी सरकार 90% जिम्मेदार है. मैं पहले भी आवाज उठाता रहा हूं और आगे भी उठाता रहूंगा. प्रदीप यदु ने कहा कि राफेल डील हिंदुस्तान का सबसे बड़ा घोटाला होगा.

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