दुनिया भर में तकरीबन 2 करोड़ लड़कियां कभी भी नहीं लौट पाएंगी स्कूल: मलाला यूसुफजई

कोरोना काल में 94 फीसदी छात्र शिक्षा से दूर

इस्लामाबाद: संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक साइड इवेंट में पाकिस्तानी शिक्षा कार्यकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने स्वीकार किया कि कोरोना वायरस हमारे सामूहिक लक्ष्यों जैसे कि महिलाओं को शिक्षित करने के लिए एक बड़ा झटका है।

मलाला ने कहा कि अकेले शिक्षा की बात करें तो यदि कोरोना काल का संकट भी समाप्त भी हो जाए तो भी दुनिया में 2 करोड़ से अधिक लड़कियां दोबारा अपने क्लासरूम नहीं लौट सकेंगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक शिक्षा वित्तपोषण का अंतर पहले ही बढ़कर 200 अरब डॉलर प्रति वर्ष हो गया है।

पिछले माह जारी की गई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक महामारी ने इतिहास में शिक्षा प्रणालियों में सबसे अधिक व्यवधान पैदा किया है, इससे 190 देशों और सभी महाद्वीपों से लगभग 1.6 अरब छात्र प्रभावित हुए हैं। स्कूलों और अन्य शिक्षण स्थानों के बंद होने से दुनिया की 94 प्रतिशत छात्रों पर गहरा असर पड़ा है, जो निम्न और निम्न-मध्य आय वाले देशों में 99 प्रतिशत तक है।

मलाला ने हक पर पूछे कई प्रश्न

मलाला ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि पांच वर्ष पूर्व संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित टिकाऊ वैश्विक लक्ष्यों ने लाखों लड़कियों के भविष्य का प्रतिनिधित्व किया था। जो शिक्षा चाहते थे और समानता के लिए लड़ रहे थे। यह देखते हुए कि उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पिछले पांच वर्षों में कुछ नहीं किया गया, इस पर मलाला ने विश्व निकाय से पूछा, आप कार्य करने की योजना कब बना रहे हैं? जब आप शांति को प्राथमिकता देंगे और शरणार्थियों की रक्षा करेंगे? आप कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिए नीतियां कब पारित करेंगे?

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