मालदीव में सरकार समर्थित एक अखबार में छपा मोदी विरोधी लेख

मालदीव में सरकार समर्थित एक अखबार में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक लेख छापने को लेकर विवाद हो गया है

मालदीव में सरकार समर्थित एक अखबार में छपा मोदी विरोधी लेख

मालदीव में सरकार समर्थित एक अखबार में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक लेख छापने को लेकर विवाद हो गया है. वहां के विपक्षीय गठबंधन ने इसकी आलोचना की है और कहा है कि इससे भारत विरोधी भावना जाहिर होती है.

यह लेख वेबसाइट वगुथु के संपादकीय में ‘India is not a best friend, but an enemy!’ हेडलाइन से छपा है. इसे सरकार समर्थित वेबसाइट माना जाता है. इसमें यह भी कहा गया है कि मालदीव को देखने का भारत का परंपरागत नजरिया अब बदल गया है. लेख में कहा गया है कि भारत अब मालदीव को ईर्ष्या, स्वार्थ से भरे हुए और द्वेष की भावना से देखता है.

वहां की एमडीपी वेबसाइट पर एक बयान जारी करते हुए कहा गया है, वगुथु राष्ट्रपति यामीन का मुखपत्र है. इसका संपादकीय छपने से पहले राष्ट्रपति ऑफिस से मंजूरी लेता है. बता दें कि भारतीय प्रधानमंत्री को लेकर छपे इस लेख को लेकर वहां के दो पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद और मौमून अब्दुल गयूम ने आलोचना की है.

गयूम ने ट्वीट किया, मालदीव के लोग इस नजरिए से इसे नहीं देखेंगे. भारत हमेशा से मालदीव के नजदीक और विश्वासपात्र दोस्त रहा है.

नाशीद ने ट्वीट किया, वगुथु में भारत के खिलाफ छपे इस ऑर्टिकल की आलोचना करता हूं. राष्ट्रपति की विदेश नीति भारत के साथ रिश्ते को बिगाड़ रही है. मालदीव हमेशा से भारती की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील रहा है.

संपादकीय में भारत की कश्मीर नीति और इस्लाम को लेकर अपनाए जा रहे रवैये पर टिप्पणी की गई है. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘अतिवादी हिंदू’ बताया गया है. इसमें ये भी कहा गया है कि उसके चीन से बढ़ते रिश्ते को लेकर भारत उसके ईर्श्या की भावना रखता है.

संपादकीय में ये भी कहा गया है कि अब समय आ गया है कि मालदीव को नए दोस्तों की तलाश करनी चाहिए. बता दें कि मालदीव दक्षिण एशिया में एक मात्र पड़ोसी देश है जहां नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक नहीं गए हैं

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